गर्भवती महिलाओं और अतिकुपोषित बच्चों को सरकार दोपहर के वक्त निशुल्क पौष्टिक भोजन कराएगी। इसकी जिम्मेदारी बाल विकास विभाग को सौंपी गई है। हालांकि भोजन कब से दिया जाएगा, इसकी तिथि अभी तय नहीं है। बावजूद इसके विभाग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। जिले में करीब 50 हजार महिलाओं और बच्चों को पौष्टिक भोजन देने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पौष्टिक भोजन के अभाव में गर्भवती महिलाओं और बच्चों का पूर्ण रूप से विकास नहीं हो पाता है। इसी वजह से बच्चे कुपोषित और अतिकुपोषित होते हैं। इसे लेकर पिछले दिनों जब बाल विकास विभाग ने सर्वे कराया तो पता चला कि गोरखपुर में करीब 32 हजार 563 अतिकुपोषित बच्चे हैं। सर्वे में गर्भवती महिलाओं को भी शामिल किया गया था।
इसकी विस्तृत रिपोर्ट विभाग ने शासन को भेजी थी। इसी के बाद शासन स्तर पर अतिकुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को एक टाइम पौष्टिक भोजन देने का निर्णय लिया गया। इसके लिए जिले के 4032 आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन की व्यवस्था की गई है। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र संचालिकाओं को जिला मुख्यालय से इस बाबत निर्देश भी दिया जा चुका है।
बच्चों को मिलेगा हलुआ, दलिया
बच्चों को रोटी, दाल, चावल के बजाय हलुआ, दलिया, खिचड़ी जैसे तरल पदार्थयुक्त पौष्टिक आहार सप्ताह में छह दिन दिए जाएंगे, जबकि गर्भवती महिलाओं को भोजन के अलावा प्रतिदिन एक मौसमी फल भी दिया जाएगा। रविवार को बच्चों और महिलाओं को भोजन नहीं दिया जाएगा।
महिलाओं के लिए मेन्यू
सोमवार- रोटी और सोयाबीन की सब्जी
मंगलवार- चावल और दाल
बुधवार- तहरी और दही
बृहस्पतिवार- रोटी, दाल और दही
शुक्रवार -तहरी और दही
शनिवार- चावल और सोयाबीनयुक्त सब्जी
विभाग की तैयारी पूरी है। जिले के चार हजार 32 आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन बनाने की व्यवस्था हो चुकी है। भोजन आंगनबाड़ी सहायिका बनाएंगी। दिन के 12 से एक बजे तक महिलाओं और बच्चों को भोजन दिया जाएगा। हालांकि आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन का वितरण कब से होगा, इसकी अभी कोई तिथि तय नहीं है।
- हेमंत सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी, गोरखपुर