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गांव-गांव घूमकर झोपड़ी तलाश रहे अफसर

Tue, 01 Mar 2016 08:31 PM IST
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
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वित्तीय वर्ष समाप्त होने में कुछ ही दिन रह गए हैं। सरकारी महकमों में हलचल बढ़ गई है। सभी ने सरकारी योजनाओं के मद में मिली रकम का एक बार फिर हिसाब-किताब शुरू कर दिया है। बचा फंड खर्च करने के लिए दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं तो जारी रकम से हुए कामों की समीक्षा भी की जा रही है।
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ग्राम्य विकास विभाग में लोहिया आवास के लिए पहले से पड़ा करोड़ों का फंड महकमे के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। ऐसे जरूरतमंद गरीब ही नहीं मिल रहे हैं जिनके पास आवास नहीं है। यही वजह है कि विभाग के अफसर गांव-गांव घूमकर झोपड़ी में रहने वालों की तलाश कर रहे हैं। इसमें एसडीएम से भी मदद मांगी गई है।

जिले को वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए 1045 आवास मिले थे। इनमें से 1000 आवास आवंटित कर दिए गए। प्रत्येक को 1.37 लाख रुपये की पहली किस्त भी उनके खातों में भेज दी गई है, मगर अब भी बाकी बचे 145 आवासों के लिए पात्र नहीं मिल रहे हैं। सर्वे में कुछ गरीबों का चयन भी किया गया था मगर जब दूसरी बार उनकी जांच कराई गई तो वे पात्रता सूची से बाहर कर दिए गए। खुद सहजनवां के ही एसडीएम ने ही पत्र भेजकर पांच लोगों को अपात्र बताया था। चूंकि लोहिया आवास योजना मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में है लिहाजा गरीबों के चयन में कोई चूक न हो जाए, इसे लेकर अफसर सतर्क हैं।
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ग्राम्य विकास विभाग के परियोजना निदेशक अनिल कुमार का हालांकि कहना है बाकी बचे आवासों के लिए पात्रों का चयन हो गया है। एहतियातन उनकी दोबारा जांच कराई जा रही है। बताया कि प्रत्येक लाभार्थी को 2.75 लाख रुपये मिलते हैं। 30 हजार रुपये का नेडा अलग से सामान लगवाता है। इसमें एक सोलर लाइट, बैट्री, पैनल, एक पंखा, दो एलईडी बल्ब और एक चार्जर शामिल है। आवास के लिए 30 वर्ग मीटर जमीन का मानक है। इसमें दो कमरा, एक किचन और शौचालय शामिल है।
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