शहर को एलईडी बल्बों से रोशन करने की सरकार और नगर निगम की योजना में अड़चन आ गई है। इस काम को करने के लिए सिर्फ एक कंपनी द्वारा ही टेंडर भरे जाने से इसे तकनीकी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसके लिए गठित कमेटी ने अब नगर आयुक्त पर फैसला छोड़ दिया है।
ऊर्जा संरक्षण के लिए शहर के सभी हैलोेजन और सोडियम लाइटों को एलईडी बल्ब से बदलने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार शहर की करीब 28 हजार स्ट्रीट लाइटों को बदलने में तकरीबन 42 करोड़ की लागत आने की संभावना है। इसे देखते हुए टेंडर जारी किया गया था, लेकिन सिर्फ एक फर्म ने ही टेंडर डाला, जबकि नियमानुसार किसी भी टेंडर के लिए कम से कम तीन फर्म द्वारा टेंडर डाला जाना जरूरी है। ऐसे में तकनीकी रूप से टेंडर अमान्य कर दिया गया है। इसके बाद नगर आयुक्त ने चीफ इंजीनियर, लेखा अधिकारी एवं मुख्य नगर लेखा परीक्षक की कमेटी गठित कर राय मांगी। इन तीनों अधिकारियों ने टेंडर को तकनीकी रूप से गलत ठहराते हुए नगर आयुक्त से इस पर निर्णय लेने की सिफारिश की है।
हर माह 28 लाख रुपये बिजली बिल चुकाता है नगर निगम
पूरे शहर में स्ट्रीट लाइटें दिन में भी जलती रहती हैं। शासनादेश के बावजूद कभी न तो नगर आयुक्त पर जुर्माना लगा और न ही स्ट्रीट लाइटों के दिनभर जलने से रोकने के लिए नगर निगम की कवायद सफल हो सकी। काफी खर्चीला होने से नगर निगम ने शहर के सभी स्ट्रीट लाइटों को सौर ऊर्जा से जलाने की योजना पर विराम लगा दिया था। इसके बाद स्ट्रीट लाइटों को एलईडी में बदलने का निर्णय लिया गया। नगर निगम बिजली के मद में हर माह तकरीबन 28 लाख रुपये चुकाता है। बिजली की बर्बादी रोकने और बिजली के मद में कटौती के मकसद से नगर निगम ने हैलोजन और सोडियम लाइटों को एलईडी में बदलने का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
34 हजार स्ट्रीट लाइट बदलने का है प्रस्ताव
शहर में तकरीबन 28 हजार स्ट्रीट लाइट के प्वाइंट हैं। सभी हैलोजन या सोडियम लाइटें हैं। इन पर बिजली की खपत काफी ज्यादा होती है। इनके अलावा छह हजार खंभों पर स्ट्रीट लाइट प्वाइंट नहीं हैं। फिलहाल एनर्जी सेविंग अभियान के तहत 28 हजार स्ट्रीट सोडियम और हैलोजन लाइट प्वाइंट को एलईडी में बदलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।