इंसेफेलाइटिस से मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे में तीन और मरीजों की मौत हो गई, जबकि 20 नए मरीजों को भर्ती किया गया है। इस तरह जनवरी से अब तक हुईं मौतों का आंकड़ा 200 पहुंच गया है।
इंसेफेलाइटिस मरीजों के इलाज को लेकर शासन से लेकर प्रशासन तक मुस्तैदी दिखाते हैं, लेकिन दवा की कमी और इलाज में लापरवाही से हो रही मौतों को नहीं रोका जा पा रहा है। प्राथमिक उपचार न मिल पाने का संकट आज भी बना हुआ है। मेडिकल कॉलेज डॉक्टरों का तर्क है कि स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों का इलाज नहीं हो रहा जिस वजह से मौतें हो रही है, जबकि मेडिकल कॉलेज में दवा और इलाज में लापरवाही का सवाल उठता रहा है।
24 घंटों में जिन मरीजों की मौत हुई है, उनमें महराजगंज नौतनवां की सपना (8), देवरिया के एकौना की अंकिता (11), गोरखपुर गुलरिहा की अराधना (2) शामिल हैं। वहीं गोरखपुर के पांच, कुशीनगर और देवरिया के तीन-तीन, महराजगंज और सिद्धार्थनगर के दो-दो, बिहार के चार और संतकबीरनगर के एक मरीज को भर्ती किया गया है। जनवरी से लेकर अब तक 790 मरीजों का इलाज हो चुका है। इनमें 200 अपनी जान गवां चुके हैं, जबकि 108 मरीज अब भी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं।
इंसेफेलाइटिस मरीजों के लिए खुलेगा हेल्प डेस्क
इंसेफेलाइटिस मरीजों की मदद के लिए मेडिकल कॉलेज में अब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर हेल्प डेस्क खोला जाएगा। बृहस्पतिवार को जिला जज चैतन्य कुमार कुलश्रेष्ठ इसका उद्घाटन करेंगे। इसके जरिए तेज बुखार से पीड़ित मरीजों को जांच व इलाज की सुविधा दिलाई जाएगी। मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस के मरीजों को वार्ड खोजने में काफी परेशानी होती है। इस मकसद से दीवानी न्यायालय के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर हेल्प डेस्क खोलने का निर्णय लिया गया है। डॉ. वीके श्रीवास्तव को इसका संयोजक बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के चैनल गेट के पास हेल्प डेस्क सेंटर होगा। यह 24 घंटे खुला रहेगा। बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे से सेंटर काम करना शुरू कर देगा। इसमें तीन शिफ्ट में कर्मचारियों की तैनाती होगी। वे तेज बुखार से पीड़ित मरीज व तीमारदार को वार्ड 12 या वार्ड 100 बेड में ले जाएंगे। इसके अलावा मरीज की जांच, इलाज व दवा मुहैया कराने में भी वे मदद करेंगे। वर्ष 2014 में भी यह प्रयोग किया गया था। उस दौरान करीब दो हजार मरीजों की मदद हुई थी।