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टेंट हाउस ही नहीं चलाते, घर भी बसाते हैं शैलेश

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टेंट हाउस ही नहीं चलाते, घर भी बसाते हैं शैलेश
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संतकबीरनगर। आज के इस दौर में जब इंसान चंद रुपयों की खातिर जान का दुश्मन बन जा रहा है तब बड़गो गांव के शैलेश सिंह बरबस याद आने लगते हैं। वह धार्मिक आयोजनों में नि:शुल्क टेंट तो मुहैया कराते ही हैं सीजन में टेंट हाउस की पहली बुकिंग की पूरी धनराशि किसी गरीब कन्या की शादी में दान दे देते हैं। अपने विद्यालय में 51 बेटियों को मुफ्त शिक्षा देने वाले शैलेश स्कूल से दो किलोमीटर के दायरे में रहने वाली छात्राओं को बिना कोई फीस लिए अपने वाहन से स्कूल और घर पहुंचवाते हैं। वह अब तक नौ लड़कियों की शादी भी अपने खर्च से करा चुके हैं।
शैलेश ‘शाकाहारी टेंट हाउस’ संचालित करते हैं। किसी के यहां रामचरित्र मानस पाठ, भागवत कथा, रामलीला, यज्ञ और बह्मभोज आदि कार्यक्रम हो तो वह सामान का किराया नहीं लेते। टेंट हाउस के सभी वाहनों पर उन्होंने बाकायदा इस बारे में लिखवा रखा है। अगर किसी ने बेटी की शादी के लिए बुकिंग कराई तो वे काफी रियायत कर देते हैं। आठ वर्ष पूर्व टेंट हाउस खोलते वक्त ही उन्होंने सोच लिया था कि उनके बर्तनों में मांसाहारी भोजन नहीं बनेगा। वह बुकिंग के दौरान लोगों की इस बारे में बता देते हैं। यहीं नहीं, शादी विवाह में उनके कर्मचारी मांसाहारी भोजन न बने, इसकी निगरानी भी करते हैं।
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ऐसे मिली प्रेरणा
बकौल शैलेश, पांच वर्ष पूर्व दुकान के सामने हादसे में बाइक सवार मां-बेटे की मौत हो गई। दोनों पड़ोस के गांव के थे। घरवालों का रोना देखकर कई दिनों तक मन खिन्न रहा। कई रात नींद नहीं आई। उनका दु:ख दूर नहीं कर सकता था पर समाज के लिए क्या करूं यहीं विचार मन में हलचल मचा रहा था। हादसे के शिकार मां-बेटे के परिवार के लोग जब बह्मभोज के लिए टेंट का सामान बुक कराने आए तो मैंने उसी दिन प्रण कर लिया कि किसी भी ऐसे और धार्मिक कार्यों में टेंट के सामान का किराया नहीं लूंगा। अब तक तकरीबन 500 आयोजनों में नि:शुल्क टेंट का सामान मुहैया करा चुका हूं।
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सामाजिक कार्यों की लंबी है फेहरिस्त
शैलेश सिंह अपने विद्यालय में 51 बेटियों को मुफ्त शिक्षा देते हैं। उनके स्कूल से दो किलोमीटर के दायरे में रहने वाली सभी छात्राओं को उनका स्कूली वाहन बिना फीस लिए लाता और ले जाता है। वह कई गरीब बच्चों की शिक्षा की भी पूरी जिम्मेदारी उठाते हैं। शैलेश अब तक नौ लड़कियों की शादी अपने खर्चे पर करा चुके हैं। शैलेश सिंह बताते हैं कि उनकी इस सामाजिक मुहिम में अब लोग भी साथ देने लगे हैं। कुछ लोग बर्तन समेत कई प्रकार के सामान दान में भी देने लगे हैं।
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