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दोपहर बार एटीएम में ‘नो कैश’

Wed, 30 Nov 2016 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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एटीएम के बाहर लगी लाइन। - फोटो : Shivharsh Dwivedi
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नोटबंदी के 21वें दिन आम लोग ही नहीं बैंक भी करेंसी की किल्लत से जूझ रहे हैं। एक बार फिर मंगलवार को बैंकों को रिजर्व बैंक से करेंसी नहीं मिल सकी। इस वजह से लोगों नेे सुबह से बैंक के खुलने और एटीएम में करेंसी भरे जाने का इंतजार किया। इसके बाद शुरू हुई लंबी-लंबी कतार। यह नजारा कई स्थानों पर दिखाई पड़ा।
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सोमवार को रिजर्व बैंक से मिली करेंसी से मंगलवार को बैंकों और एटीएम से कुछ लोगों का काम चला, लेकिन बैंक ऑफ बड़ौदा के मार्फत शहर के 16 बैंकों को उपलब्ध कराई गई रकम जरूरतों के अनुसार नाकाफी रही। यही वजह थी कि अधिकांश बैंक और एटीएम लोगों को राहत देने में नाकाम रहे। बैंकों का अधिक ध्यान ग्राहकों को भुगतान करने पर रहा। इस वजह से शहर के कुछ ही एटीएम में बैंकों द्वारा करेंसी डाली गई। एटीएम पर करेंसी लेकर कैश वैन के पहुंचने की आस में कई एटीएम पर सुबह से ही लोगों की कतार लगी रही। मंगलवार को एक बार फिर एसबीआई और एचडीएफसी के एटीएम का लोगों को सहारा मिला।

एसबीआई के बैंक रोड, रुस्तमपुर, बेतियाहाता के अलावा कुछ अन्य एटीएम पर लोगों की लाइन लगी रही वहीं बैंक रोड, तारामंडल, रुस्तमपुर समेत एचडीएफसी के कुछ एटीएम से लोग पैसे निकालने में कामयाब रहे। बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई के कुछ एटीएम से भी लोगों को राहत मिली। मंगलवार को करेंसी न मिल पाने से लोगों को परेशानी हो सकती है। स्टेट बैंक के एजीएम, पीएनबी के चीफ मैनेजर समेत कुछ अन्य बैंक के अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार को आरबीआई से करेंसी नहीं मिली है। बुधवार दोपहर तक आने की संभावना है। ऐसे में बैंकों और एटीएम की स्थिति दोपहर बाद ही सामान्य होगी। शादी वाले परिवारों को मिली करेंसी एसबीआई मेन ब्रांच मंगलवार को एक बार फिर शादी वाले परिवारों का सहारा बना। मंगलवार को भी तीन लोगों को उनके खाते से 6.80 लाख रुपये दिए गए। नोडल अधिकारी शकील अहमद ने रिजर्व बैंक के नए निर्देशानुसार जिनके आवेदन सही पाए गए, उन सभी को रुपये दिए गए। कहा कि बैंक ऐसे परिवारों की हरसंभव कोशिश में लगा है। स्टेट बैंक के एजीएम अमर सिंह ने कहा कि बैंक जरूरतमंद का ध्यान रखने की पूरी कोशिश कर रहा है।
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बैंक खाताधारकों को दे रहा प्राथमिकता करेंसी की किल्लत के चलते एसबीआई, पीएनबी, एचडीएफसी, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत अन्य सभी बैंक किसी शाखा को पांच लाख तो किसी को 10 लाख रुपये दे रहे हैं, जबकि जरूरत के अनुसार यह रकम काफी कम है। ऐसे में अधिकांश बैंक अपने खाताधारकों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। मंगलवार को तारामंडल स्थित एचडीएफसी शाखा से कई ऐसे लोगों को लौटा दिया गया, जिनका उस शाखा में एकाउंट नहीं था।
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