रामगढ़ताल वेट लैंड मामले में जीडीए को झटका
गोरखपुर। रामगढ़ताल वेट लैैंड मामले में गोरखपुर विकास प्राधिकरण को पहले ही प्रयास में झटका लग गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की हाई पावर कमेटी ने प्राधिकरण के प्रत्यावेदन को ठुकरा दिया है। अब जीडीए के सामने इस मामले में राहत पाने के लिए एनजीटी और वहां भी पक्ष में सुनवाई नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट में अपील करना ही अंतिम विकल्प रह गया है। कमेटी की संस्तुति के बाद से ही ताल किनारे रहने वाले करीब 50 हजार लोगों में हड़कंप मची हुई है। इसके अलावा जीडीए के भी सभी निर्माण कार्य बंद हैं। अगर संस्तुति पर कार्रवाई होती है तो जीडीए का वजूद ही संकट में आ जाएगा।
ताल के पांच सौ मीटर के दायरे में सभी निर्माण ध्वस्त कराने की एनजीटी की हाई पावर कमेटी की संस्तुति के लिए जीडीए ने हाई पावर कमेटी को पुनर्विचार के लिए प्रत्यावेदन दिया था। लंबी कवायद के बाद बुधवार को इसपर सुनवाई की तिथि तय हुई थी मगर जीडीए को इसका कोई लाभ नहीं मिला। जीडीए के उपाध्यक्ष ए. दिनेश कुमार और अधिवक्ता ने प्राधिकरण का पक्ष रखा मगर कमेटी के अध्यक्ष डीपी सिंह का कहना था कि कमेटी के हाथ में अब कुछ नहीं रह गया। 19 जुलाई की सुनवाई में एनजीटी ने कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। ऐसे में वे अब अपनी रिपोर्ट में कोई बदलाव कर ही नहीं सकते।
जीडीए एनजीटी में अपील की कर रहा तैयारी
जीडीए भी एनजीटी की हाई पावर कमेटी से बहुत राहत मिलने की उम्मीद नहीं मिलने की मान कर चल रहा था। यही वजह है कि प्राधिकरण ने एनजीटी में सीधे अपील की तैयारी भी शुरू कर दी है। इसके अलावा प्राधिकरण, ताल के मामले को लेकर कमेटी की संस्तुति के बारे में शासन को भी पूरी जानकारी देने के साथ ही मदद की गुहार लगाने की भी तैयारी कर रहा है।
कोट
एनजीटी ने 19 जुलाई की सुनवाई में कमेटी की रिपोर्ट स्वीकार कर ली है लिहाजा अब हम चाहकर भी उसमें कोई बदलाव नहीं कर सकते। जीडीए लगातार एनजीटी के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहा था। अब प्राधिकरण सीधे एनजीटी और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रख सकता है।- राजेंद्र सिंह, सचिव, हाई पावर कमेटी
जीडीए ने कमेटी के सामने अपना पक्ष रख दिया है। तीन-चार दिन में निर्णय होने की उम्मीद है। इसके बाद आगे की रणनीति तय होगी- रामसिंह गौतम, सचिव जीडीए