पूर्वोत्तर रेलवे को अब नगर निगम द्वारा निर्धारित सर्विस चार्ज कम चुकाना होगा। नगर निगम द्वारा एनईआर पर पूर्व में निर्धारित 10 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की कमी आ गई है। अब उसे केवल 5.49 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज देना होगा। दरअसल एनईआर द्वारा अपनी आवासीय और कार्यालय आदि संपत्तियों की गलत जानकारी देने से यह चार्ज ज्यादा निर्धारित हो गई थी। रेेलवे ने लखनऊ और वाराणसी मंडल के कार्यालय और आवासीय संपत्तियों की भी जानकारी दे दी थी।
अप्रैल 1967 में पूर्वोत्तर रेलवे पर 10 लाख रुपये सर्विस चार्ज निर्धारित किया गया था। उसके बाद से रेलवे यही सर्विस चार्ज चुकाता आ रहा है। 48 साल बाद नगर निगम ने रेलवे के सर्विस चार्ज 10 गुना बढ़ाकर 10.03 करोड़ रुपये कर दिया गया था। दरअसल गोरखपुर शहर के काफी बड़े भूभाग पर पूर्वोत्तर रेलवे का विस्तार है। इसके बावजूद नगर निगम काफी कम सर्विस चार्ज लेता है। लेकिन जब शासन द्वारा नगर निगम की राज्य वित्त की निधि में कटौती कर दी गई तो निगम ने विभिन्न संस्थानों पर नए सिरे से सर्विस चार्ज और टैक्स निर्धारित कर दिया। नगर निगम के टैक्स अधीक्षक गणेश प्रसाद ने बताया कि रेलवे को 5.49 करोड़ सर्विस चार्ज का नोटिस दिया गया है। अगर रेलवे को आपत्ति होगी तो वह अपना पक्ष रख सकता है।
क्या है सर्विस चार्ज
नगर निगम क्षेत्र के मकान, दुकान, कार्यालय, शिक्षण संस्थानों से हाउस टैक्स, वाटर टैक्स और सीवर टैक्स लिया जाता है। उसी तरह केंद्रीय संस्थानों से भी टैक्स लिया जाता है, लेकिन इसे सर्विस चार्ज कहा जाता है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी रबीश चंद्र का कहना है कि केंद्रीय संस्थानों से लिया जाने वाला यह सर्विस चार्ज, सामान्य टैक्स की तुलना में कुछ कम ही होता है। जिन इलाकों में नगर निगम पूरी सुविधा मुहैया करा रहा होता है उन इलाकों के केंद्रीय संस्थानों से 75 प्रतिशत, आधी-अधूरी सुविधा वाले क्षेत्रों में 50 प्रतिशत और जहां कोई सुविधा नहीं दी जाती, वहां 35.25 प्रतिशत टैक्स लिया जाता है।