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मिशनरीज के दबाव में हैं नेपाल के नेता

Mon, 01 Feb 2016 10:41 PM IST
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
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सदियों से हिंदू राष्ट्र नेपाल आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। एक षड़यंत्र के तहत कुछ मिशनरीज नेपाल के राजनेताओं के माध्यम से नेपाल की पहचान को समाप्त करने में लगे हुए हैं। साथ ही भारत को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नेपाल की जनता दिल से भारत से जुड़ी हुई है और अपेक्षा करती है कि नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने में भारत एक प्रभावशाली भूमिका निभाए।
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ये बातें राष्ट्रीय हिंदू एकता मंच नेपाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्र प्रसाद ओली ने कहीं। वह सोमवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित भारतीय संत सभा-चिंतन बैठक में शामिल होने गोरखपुर आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि सदियों से नेपाल और भारत की संस्कृति एक रही है। लेकिन कुछ मिशनरीज साजिश करके इसे खत्म करने में लगे हुए हैं। नेपाल की जनता भारत के साथ दोस्ती चाहती है, लेकिन कुछ राजनेता अपना स्वार्थ साधने के लिए जनता में फूट डाल रहे हैं। मदेसियों का आंदोलन भी नेताओं के स्वार्थ के कारण है।

संभव में शनिदेव मंदिर में महिलाओं का प्रवेश शुरू हो जाए : नामदेव महाराज राउत
भक्ति वेदांत सेवा समिति, केज (वीड़), महाराष्ट्र के अध्यक्ष नामदेव महाराज राउत का कहना है कि बदलाव प्रकृति ही नहीं समाज का भी विधान है। शनिदेव मंदिर के चबूतरे पर महिलाओं के जाने को लेकर जो विवाद चल रहा है, उसमें भी बदलाव संभव है। विश्व के एक मात्र हिंदू धर्म में ही महिलाओं को पुरूष की तुलना में प्रधानता दी गई है। यहां तक भगवान के नाम में भी पहले सीता के बाद राम का, राधा के बाद कृष्ण का नाम आता है। ऐसे में महिलाओं के साथ भेदभाव की बात धार्मिक रूप से नहीं, बल्कि कुछ सामाजिक वजहों से है। संभव है कि इसमें भी बदलाव हो जाए। वहीं धर्म और राजनीति के मेल पर उन्होंने कहा कि इसको कभी अलग नहीं किया जा सकता। क्या धर्म को साथ रखे बिना राम राज्य संभव हो सका था। अगर राजनीति धर्म के साथ है तो ही एक बेहतर समाज का निर्माण संभव हो सकेगा।
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वैज्ञानिक तथ्य भी परखने की आवश्यकता: स्वामी कृष्णानंद
कैलाश आश्रम ऋषिकेश के स्वामी कृष्णानंद का कहना है कि हमारे धर्म में महिलाओं को काफी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। अगर शनिदेव मंदिर के चबूतरे पर महिलाओं के चढ़ने पर जो रोक लगाई गई है निश्चित तौर पर धार्मिक कारणों के अलावा कुछ सामाजिक कारण भी हैं। संभव है कि इसका कुछ वैज्ञानिक कारण भी हो। हिंदू शास्त्रों में महिलाओं को पूजनीय कहा गया है। ऐसे में उनके साथ भेदभाव करने के पीछे के धार्मिक, सामाजिक एवं वैज्ञानिक कारणों को भी परखा जाना चाहिए।
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