रेलवे ने क्लास वन के जिन 32 अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्ति दी है उनमें पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य परिचालन प्रबंधक (सीपीटीएम) एमके सिंह भी शामिल हैं। एमके सिंह पर लखनऊ स्टेशन के 28 लाख रुपये अपने पास ही रखने सहित कई गंभीर आरोप हैं। मामले की सीबीआई भी जांच कर रही है। सीबीआई के चंगुल में फंसने के बाद वे चर्चा में आए थे। तब से ही माना जा रहा था कि एमके सिंह पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
1993 बैच के आईआरटीएस एमके सिंह एनईआर के सीपीआरओ भी रह चुके हैं। बीते दो साल से वे पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीटीएम पद पर तैनात थे। इसके पूर्व वे डिप्टी सीओएम, सीनियर सीएसओ और सीनियर डीसीएम पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। 2014 में लखनऊ में बतौर सीनियर डीसीएम रहते उन पर स्टेशन की आय के करीब 28 लाख रुपये निजी कार्य के लिए रखने का केस दर्ज किया गया था।
तत्कालीन महाप्रबंधक मधुरेश कुमार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। लेकिन तीन महीने बाद ही उनकी तैनाती सीनियर डीएसओ के पद पर कर दी गई। इसके बाद एमके सिंह को गोरखपुर मुख्यालय पर डिप्टी सीओएम निर्माण के पद पर तैनाती दी गई। तीन से चार महीने बाद ही परिचालन विभाग में सीपीटीएम पद पर तैनाती मिल गई। इस मामले में सीपीटीएम एमके सिंह से उनके मोबाइल पर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। जब भी उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।