घाघरा नदी के रामबाग घाट पर शनिवार को नाव पलटने से चपरा पूर्वी गांव की रहने वाली चार महिलाएं डूब गई थी। जबकि 14 लोग तैर कर अपनी जान बचा लिए थे। दूसरे दिन रविवार को भी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें चार नावों से घाघरा में डूबी चारों महिलाओं की तलाश की।
घटना स्थल से करीब आठ किलोमीटर की दूरी से एनडीआरएफ की टीम ने एक महिला के शव को ढूंढ निकला। जबकि तीन महिलाएं अभी भी लापता है। पीड़ित परिजन शव को देख कर सकते में आ गए और दहाड़े मार कर रोने लगे।
शनिवार की सुबह नदी के उस पार धान की कटाई करने एक छोटी नाव पर सवार होकर चपरापूर्वी और बालमपुर गांव के 18 लोग जा रहे थे। जब उस पार पहुंचे तो किनारे से थोड़ी दूरी पहले ही नाव पलट गई। जिससे उसमें सवार 14 लोगों ने तैर कर अपनी जान बचा गए। जबकि चार महिलाएं लापता हो गई।
नदी में लापता 28 वर्षीय माया पुत्री नंदलाल, 28 वर्षीय रेखा पुत्री हरिवंश, 18 वर्षीय रुमा पत्नी सत्यपाल और 18 वर्षीय कविता पुत्री रामनयन की तलाश तो स्थानीय गोताखोर घटना के बाद से शुरू कर दिए थे। जबकि बाद में पहुंची एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम भी तलाश में जुट गई।
शनिवार की शाम तक किसी का पता नही चला था। जबकि रामबाग घाट पर लोगों की भीड़ जुटी थी। उसके बाद अंधेरा होने के कारण तलाश बंद कर दिया गया। रविवार की सुबह से पुन: दोनों टीमें चार नावों से लापता चारों लोगों की तलाश शुरू की। धनघटा पुलिस भी सहयोग में लगी रही।
एसओं रणधीर मिश्र ने बताया कि दौलतपुर गांव के पास से डूबी कविता पुत्री रामनयन की लाश मिल गई है। जबकि अन्य की तलाश जारी है। डीएम रवीश गुप्त ने बताया कि घाघरा में डूबी चारों महिलाओं की तलाश एनडीआरएफ की टीम के 25 सदस्य और एसडीआरएफ के 25 सदस्यों ने अलग-अलग चार नावों से शुरू की। दोनों टीमों ने नदी को खंगला और घटना स्थल से आठ किलोमीटर दूरी से कविता नाम की महिला का शव ढूंढ निकला। पुलिस शव को पोस्टमॉर्टम कराएंगी। जबकि लापता तीनों महिलाओं की भी तलाश दोनों टीमें सोमवार को करेंगी। टीमों के ठहरने और भोजन का इंतजाम धनघटा तहसील में कराया गया है।