40 बीएड कॉलेजों के एनओसी और शिक्षक अनुमोदन में फर्जीवाड़े के मामले में गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने गेंद एनसीटीई के पाले में डाल दी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एनसीटीई को पत्र लिखकर स्थिति साफ करने कहा है। साथ ही एनसीटीई के फैसले की आड़ में सभी कॉलेजों को सशर्त पैनल निरीक्षण की चिट्टी जारी कर दी है।
उधर, यूनिवर्सिटी के इस रुख से 22 कॉलेजों ने निरीक्षण के पैनल की मांग कर दी है लेकिन 18 कॉलेज बैकफुट पर चले गए हैं। इन कॉलेजों की ओर से पैनल के लिए अह तक कोई पहल नहीं की गई है।
एनसीटीई-2014 रेग्युलेशन के मुताबिक किसी कॉलेज को बीएड की मान्यता के लिए सबसे पहले संबंधित यूनिवर्सिटी से एनओसी लेनी पड़ती है, लेकिन 40 कॉलेजों ने फर्जी एनओसी के साथ के साथ एनसीटीई से नियम 7.13 के तहत अस्थाई मान्यता ले ली। बात यहीं खत्म नहीं हुई, इन कॉलेजों ने फर्जी तौर पर शिक्षक अनुमोदन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली।
इनमें से 18 कॉलेज तो ऐसे हैं, जिनके प्रबंधन ने बिना शिक्षक अनुमोदन कराए ही नियम 7.16 के तहत स्थाई मान्यता तक हासिल कर ली और इसके बाद शिक्षक अनुमोदन कराया। यह फर्जीवाड़ा तब पकड़ में आया जब कुलपति के सामने देवरिया के दो कॉलेजों के निरीक्षण मंडल के गठन की फाइल पहुंची।
कुलपति ने इसे लेकर तत्काल एनसीटीई जयपुर के अधिकारियों से बात की तो स्थिति साफ होते देर नहीं लगी कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर मान्यता की प्रक्रिया पूरी की गई है। जब कुलपति ने इसे लेकर और जानकारी की तो पता चला कि इस फर्जीवाड़े की फेहरिस्त में 40 कॉलेज हैं।
यूनिवर्सिटी सूत्रों के मुताबिक मान्यता के लिए यदि फर्जी एनओसी के इस्तेमाल की पुष्टि एनसीटीई ने कर दी तो इन सभी कॉलेजों की बीएड मान्यता तो खतरे में पड़ ही जाएगी, संबद्धता पर भी खतरा मंडराने लगेगा। सूत्रों की मानें तो कुलपति खुद भी एनसीटीई जाकर मामले की तस्दीक करेंगे।
कार्य परिषद में रखा जाएगा मुद्दा
बिना एनओसी और फर्जी शिक्षक अनुमोदन के सहारे बीएड मान्यता हासिल करने के मामले को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कार्य परिषद के सामने रखने का फैसला किया है। कार्य परिषद की अगली बैठक 12 मई को प्रस्तावित है। यूनिवर्सिटी सूत्रों के मुताबिक परिषद बैठक के एजेंडे में इस मामले को शामिल कर लिया गया है। कार्य परिषद यह निर्णय लेगी कि दोषी कॉलेजों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए।