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नाग देवता को चढ़ा दूध और लावा

Mon, 08 Aug 2016 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
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नाग पंचमी पर नाग की पूजा करतीं श्रद्धालु। - फोटो : amar ujala
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सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन रविवार को नागपंचमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने नाग देवता के दर्शन किए और उन्हें दूध व लावा चढ़ाकर मंगल कामना की। बहुत से घरों में महिलाओं ने कजरी गाकर इस पर्व को संगीतमय ढंग से मनाया।
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पूजा-पाठ के लिए महिलाओं ने रविवार को तड़के ही उठकर स्नान-ध्यान किया और घर में नाग देवता की आकृति बनाकर पूरे विधि-विधान से उनकी आराधना की। बहुत से श्रद्धालु आसपास के शिव मंदिर और शिवालयों तक गए और नाग देवता को श्रद्धा निवेदित की। घरों और मंदिरों में दूध और लावा चढ़ाकर पूजा-अर्चना का सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। पूजा में सपेरों ने भी अपनी भूमिका बखूबी अदा की। संपेरे सबेरे से ही गली-मोहल्लों में घूमने लगे और इच्छुक श्रद्धालुओं को नाग देवता का दर्शन कराया। बहुत से श्रद्धालुओं ने गले में साक्षात नाग धारण कर अपनी पूजा की इतिश्री की।

भाई-बहनों ने ताल-तलैयों पर पहुंचकर नाग पंचमी से जुड़ी गुड़िया पीटने की परंपरा पूरी की। भाइयों ने अपने हाथ में चूना और काजल से रंगा छोटा डंडा लिया और बहनों ने चना को कपड़े में सिलकर गुड़िया बनाई। फिर दोनों आसपास के जलस्थलों पर पहुंचे, जहां बहनों ने पानी में गुड़िया फेंकी और भाइयों ने उसे पीटकर रवायत पूरी की। बहनों ने इस अवसर पर भाइयों को चने का प्रसाद खिलाया। पर्व को देखते हुए घरों में लजीज पकवान बनाए गए और नाग देवता को भोग लगाकर उसके स्वाद का लुत्फ उठाया गया।
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नागपंचमी की खबर में इनसेट पीटने की जगह झुलाई गई गुड़िया  जिले के खजनी विकास खंड के सतुआभार गांव में नागपंचमी पर गुड़िया पीटने की प्रथा का सांकेतिक विरोध जताया गया। महिला समाख्या उत्तर प्रदेश की ओर इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गुड़िया पीटने के स्थान पर गुड़िया झुलाकर और किशोरियों को मिठाई खिलाकर पर्व मनाया गया। महिला समाख्या के सदस्यों का कहना था कि गुड़िया पीटने की परंपरा महिला विरोधी है, इसीलिए उन्होंने गुड़िया झुलाकर महिलाओं को सम्मान देने की नई परंपरा शुरू की है। कोआर्डिनेटर संगीता सिंह ने बताया कि स्थापना के वर्ष से महिला समाख्या ने इस परंपरा पर सवाल उठाना शुरू कर दिया था। लड़कों का गुड़िया पीटना सीधे तौर पर महिलाओं का अपमान है। 
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