रुपयों के लालच में तांत्रिकों ने की थी किसान की हत्या, दो गिरफ्तार
गोरखपुर। संत कबीरनगर के किसान रामदास की हत्या तांत्रिकों ने रुपये के लालच में की थी। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर शनिवार को घटना का पर्दाफाश कर दिया। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि केले और दूध में नशीला पदार्थ खिलाकर वे लोगों को बेहोश कर रुपये लूट लेेते थे लेकिन रामदास बेहोश नहीं हुए तो उनके सिर पर डंडे से प्रहार कर हत्या कर दी थी। घटना में शामिल मुख्य तांत्रिक काली चरन अब भी फरार है। उसकी तलाश में पुलिस टीम लगाई गई है। पकड़े गए आरोपियाें की पहचान पीलीभीत के बरखेड़ा मधईया निवासी धर्मवीर उर्फ लल्ला और मेंहदावल निवासी पराग यादव के रूप में हुई।
पुलिस लाइंस में शनिवार को घटना का पर्दाफाश करते हुए एसपी नार्थ अरविंद पांडेय ने बताया कि पांच अगस्त की रात पीलीभीत जिले के दरखेड़ा थाना क्षेत्र के मधाईया गांव निवासी कालीचरण उर्फ बबलू और साथी धर्मवीर उर्फ लल्ला ने संतकबीरनगर मेंहदावल के घुरापाली निवासी रामदास को नदी से सोना निकालने और रुपये दूना करने का लालच दिया। दोनों रामदास को लेकर सहजनवां क्षेत्र स्थित राप्ती नदी के किनारे सिसई घाट पर पहुंचे। रामदास के गांव के टप्पू तथा दीनानाथ को लेकर बगल के गांव के पराग भी सिसई घाट पर पहुंच गया। वहां तंत्रमंत्र की प्रक्रिया के बाद जमीन से सोना निकलने की जानकारी देते हुए तांत्रिक कालीचरन ने रामदास को बीच में बैठा दिया। उनके पास मौजूद सारे रुपये एक लाल कपड़े में निकाल कर रख दिए और अन्य चारों को 25-25 फीट की दूरी पर वर्गाकार स्थिति में बैठा दिया और सभी को केला-दूध और मलाई मिलाकर खाने के लिए दे दिया। तांत्रिकों ने कहा कि विधि पूरी होने के बाद रुपये दूने हो जाएंगे और धरती से सोना निकलेगा। केला-दूध खाने के बाद टप्पू, दीनानाथ और पराग तो बेहोश हो गए पर रामदास बेहोश नहीं हो रहे थे इसलिए मुख्य तांत्रिक ने उनके सिर पर डंडे से प्रहार कर उनकी जान ले ली। इसके बाद लल्ला और कालीचरन लाल कपड़े में मौजूद रुपये रुपये लेकर फरार हो गए। एसपी नार्थ ने बताया कि रामदास के साथ गया पराग यादव मंगलवार सुबह तक घर पहुंच गया जबकि टप्पू और दीनानाथ मंगलवार की शाम तक पहुंच गए पर रामदास का पता न चलने पर परिवारीजन परेशान हो गए। वहीं तीनों ने इसकी जानकारी किसी को नहीं दी। उधर, सिसई के ग्रामीणों ने शव देखकर बुधवार को पुलिस को सूचना दी। जिसके बाद से ही पुलिस टीम लगी हुई थी। दो आरोपियों के गिरफ्तार होने के बाद पूरा मामला खुलकर सामने आया।
3.90 लाख रुपये लूटे थे, पांच हजार बरामद
रामदास की बेटी इंद्रावती ने जमीन खरीदने के लिए गहने बेच कर 2.70 लाख रुपये रामदास को दिए थे। इसके अलावा रामदास के बेटे अखिलेश के ससुर ने भी 70 हजार रुपये दिए थे। पराग को पता था कि रामदास को जमीन खरीदनी है और इसके लिए उसके पास रुपये रखे हैं। इसकी जानकारी उसने ही तांत्रिकों को दी। इसके बाद से ही दोनों तांत्रिकों और पराग ने रामदास को शिकार बनाने की कोशिश शुरू कर दी। पुलिस ने पराग यादव और तांत्रिक के सहयोगी लल्ला को गिरफ्तार किया है। लल्ला के पास से पांच हजार रुपये बरामद हुए हैं। दोनों का कहना है कि कालीचरन के पास ही रुपये हैं। गांव के टप्पू ने भी रुपये दूना होने के लालच में मौके पर ही 50 हजार रुपये दिए थे।
20 दिन पहले ही आया था मुख्य तांत्रिक
पकड़े गए लल्ला ने पुलिस को बताया कि कालीचरन के वह साथ 20 दिन पहले कैंपियरगंज इलाके में आया था। वहां उनकी मुलाकात जय किशुन से हुई थी। जय किशुन के जरिये पराग यादव संपर्क में आया था। पराग ने रामदरस से संपर्क किया लेकिन तब उसके पास रुपये नहीं थे। फिर रुपये आते ही वारदात को अंजाम देने की योजना बना ली गई।
पराग ने ही रची थी साजिश
पुलिस को पराग ने बताया कि जयकिशुन उसका रिश्तेदार है। उन्होंने बताया कि उनके पास ऐसे तांत्रिक आए हैं जो रुपये दूना कर देंगे। उन्होंने 100 रुपये का 200 करके दिखाया भी है। उनका कहना है कि ज्यादा रुपये होंगे तभी वह तंत्रमंत्र की विधि शुरू करेंगे। बस इसी के बाद पराग के मन में भी लालच आ गया और उसने रामदास को शिकार बना लिया। तांत्रिक कालीचरन और धर्मवीर 28 जुलाई को ही कैंपियरगंज आ गए थे। तब तक रामदरस के पास रुपये कम थे। इस पर तांत्रिकों ने और ज्यादा रुपयों के इंतजाम का समय दिया और इसे गोपनीय रखने के लिए कहा। रुपयों का इंतजाम होने के बाद पांच अगस्त की रात में तांत्रिक और पराग सभी को साथ ले गए और वारदात को अंजाम दिया। पराग का कहना है कि उसके साथ धोखा हुआ, वह खुद बेहोश था और दो दिन बाद होश में आया।