राम मंदिर के निर्माण को हर भारतीय स्वयं आगे आएं : मोरारी बापू
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। देश में रहने वाला कोई भी शख्स चाहे वो किसी भी मजहब का हो, सबसे पहले भारतीय है। हर भारतीय का दायित्व है कि वह प्रभु राम, जिनमें सभी की आस्था है, के मंदिर के निर्माण के लिए स्वयं आगे आए। आपसी सामंजस्य की कमी की वजह से अभी तक प्रभु राम के जन्मस्थल पर मंदिर निर्माण नहीं हो सका है।
ये बातें गुरुवार को कुसम्ही स्थित एक फार्म हाउस पर आयोजित प्रेसवार्ता में रामकथा मर्मज्ञ मोरारी बापू ने कहीं। उन्होंने कहा कि भारत एक विशाल देश है, जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, पारसी, जैन या बौद्ध समेत विभिन्न धर्र्मों में आस्था रखने वाले लोग रहते हैं। सभी पहले भारतीय हैं, उसके बाद इनका मजहब है। हर भारतीय के दिल में राम बसते हैं। सभी को मिलकर राम मंदिर के निर्माण के लिए आगे आना चाहिए। अखंड भारत की परिकल्पना पर कहा कि करीब 200 वर्ष के पहले का भारत अखंड था। जिसमें आस पास के देश शामिल थे। भले ही अब ये भारत के अभिन्न अंग नहीं हैं। मगर मन के अखंड भारत में पूरा आर्यावर्त आता है। साधु-सन्यासियों पर लग रहे गंभीर आरोपों पर कहा कि सभी ऐसे नहीं हैं। भारत श्रद्धा का देश है, ऋषियों और साधू-संतों की यहां पूजा होता है। कुछ लोगों की वजह से साधु-सन्यासियों की भूमिका पर सवाल उठाना गलत है।
युद्ध किसी समस्या का हल नहीं
बापू ने कहा कि भारत युद्ध नहीं बुद्ध को देने वाला देश है। भले ही हमारे पड़ोसी देश हमको युद्ध के लिए ललकार रहे हों। मगर युद्ध किसी समस्या का हल नहीं होता। शस्त्र को शास्त्र की छाया में ही उठाया जाना चाहिए। तभी इससे होने वाले व्यापक नुकसान को रोका जा सकता है।
युवाओं का भा रही रामकथा
युवाओं के असंस्कारी होने और उन्हें घर से निकालने के सवाल पर कहा कि मैं एक शिक्षक रहा हूं। किसी स्कूल में 100 में से 35 नंबर लाने वाले बच्चे को पास माना जाता है। ऐसे ही रामकथा में 60 प्रतिशत से ज्यादा लोग शामिल होने पहुंच रहे हैं। सुखद पहलू है कि इसमें भारी तादात युवाओं की है।