पांच सौ और हजार के नोटों पर पाबंदी का असर किचन से लेकर सड़कों पर दौड़ रहे ट्रकों के मालिकों तक पर पड़ा है। बडे़ नोटों की इस पाबंदी के प्रभाव से सरकारी महकमे भी नहीं बचे। जहां कुछ विभागों को अप्रत्याशित आय हुई, वहीं कुछ को करोड़ों को झटका भी लगा है। कहीं कर्मचारी से लेकर अधिकारियों तक के कंधों पर अचानक काम का बोझ बढ़ गया है तो कहीं के अफसर-कर्मचारियों के लिए दफ्तरों में समय काटना मुश्किल हो गया है।
बिजली बिल का बड़ा बकाया होने के बाद भी जो उपभोक्ता विभाग और जनप्रतिनिधियों के बीच पकड़ की बदौलत अब तक महकमे को छका रहे थे वे बड़े नोटों को खपाने के लिए बकाया ही नहीं एडवांस तक जमा कर रहे हैं। अब तक किसी योजना से बिजली विभाग में इतनी रकम नहीं आई थी जितनी की पिछले 10 दिनों में। विभाग के मुख्य अभियंता डीके सिंह के मुताबिक नौ नवंबर से लेकर अब तक करीब 23 करोड़ रुपये विभाग को मिल चुके हैं। इसी तरह नगर निगम को भी विभिन्न प्रकार के कर के तौर पर अच्छी आमदनी हुई है।
उधर इसके उलट प्रदेश सरकार के खजाने में हर महीने मोटी रकम का योगदान करने वाले रजिस्ट्री महकमे की इन 10 दिनों में करीब 10 करोड़ रुपये की आय प्रभावित हुई है। महकमे में बैनामों की स्टांप ड्यूटी से हर दिन 80 से एक करोड़ रुपये आते हैं मगर इसमें 70 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। इसी तरह कोषागार में जहां रोजाना 70 लाख से एक करोड़ रुपये तक के स्टांप बिकते हैं। वहां इस बीच सिर्फ तीन दिन ही स्टांप बिके। सीटीओ अजय सोनकर के मुताबिक एक दिन 12.30 लाख, दूसरे दिन 3.80 लाख और शनिवार को 15 लाख रुपये का ही स्टांप बिक सका।