प्रेसवार्ता करते नगर विधायक आरएमडी।
- फोटो : Amar Ujala
सरकार हमारी है पर मैं सरकार में नहीं हूं। मंत्री सरकार का हिस्सा होता है और विधायक जनप्रतिनिधि। एक जनप्रतिनिधि के तौर पर मेरी नैतिक जिम्मेदारी है कि मैं नागरिकों के साथ होने वाले किसी तरह के अत्याचार का विरोध करूं और उनकी समस्याओं में उनके साथ खड़ा होऊं। इसी वजह से रविवार को नकहा नंबर दो के बसंती कोइलहवा पहुंचा था। ये बातें नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने सोमवार को पत्रकार वार्ता के दौरान कहीं।
इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर उन्होंने आईपीएस चारु निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और प्रकरण में उनकी भूमिका पर सवाल उठाते हुए पुलिस पर महिलाओं के साथ बर्बरता करने का आरोप लगाया। विधायक पीड़ित महिलाओं के साथ मीडिया से रू-ब-रू हुए। उन्होंने कहा कि पूरी घटना चिलुआताल एसओ के रवैये के चलते हुई। 15 दिन पहले भी नकहा नंबर दो के बसंती कोइलहवा में आबादी के बीच शराब की दुकानों के संचालन को लेकर नागरिकों ने आपत्ति जताई थी। तब मैं भी मौके पर पहुंचा था। एसडीएम, आबकारी अधिकारी और एसओ भी पहुंचे। लोगों की बात सुनने के बाद एसडीएम ने मौके पर चल रही शराब की दुकानों को बंद करने का आदेश दिया। इसके बाद दुकानें बंद भी हो गईं। इधर पांच दिन पहले वहां फिर से शराब की दुकान खुल गई। नागरिकों ने इसे लेकर मुझे फोन किया। महिलाओं का सवाल था, ‘योगी लखनऊ चले गए तो क्या हम लोग अनाथ हो गए?’ इसी वजह से मौके पर गया।
विधायक के आरोप सही नहीं हैं। जो भी आरोप हैं, उनका कानूनी रूप से जवाब दिया जाएगा।
- चारु निगम (आईपीएस), सीओ गोरखनाथ
विधायक की भूमिका की होगी जांच
विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल और आईपीएस चारु निगम के बीच कहासुनी का मामला गरमाता जा रहा है। पुलिस अफसरों ने गोपनीय तरीके से विधायक की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। जांच को लेकर जिले के एक आला अफसर ने पत्र भी जारी कर दिया है और विधायक के बोल की जांच के लिए वीडियो और ऑडियो क्लिप की जांच के आदेश दे दिए हैं। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाया है, जिसकी क्लिप शासन के पास भी भेजी जाएगी।
पुलिस ने भले ही विधायक के खिलाफ नामजद केस दर्ज नहीं किया है लेकिन पूरे मामले को पुलिस अफसर कार्रवाई में बाधा डालने के साथ ही बदसलूकी से जोड़कर देख रहे हैं। पुलिस ने पूरे घटना की वीडियोग्राफी कराई थी, जिसे आधार बनाकर पुलिस विधायक के नाम को शामिल कर सकती हैं। पूरे प्रकरण में जिला पुलिस ने कार्रवाई में तेजी नहीं दिखाई। देर रात जिला पुलिस के अफसर लखनऊ और आला अफसरों को घटना की जानकारी देने के साथ ही उनसे मार्गदर्शन मांगते रहे। उधर आईपीएस चारु निगम ने अपने अफसरों को सूचना देने के साथ ही खुद के साथ अभद्रता की शिकायत की थी, जिसके बाद आईपीएस एसोसिएशन भी सक्रिय हो गया और फिर देर रात माथापच्ची के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।