गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की निरंकुशता ने शनिवार को तो मनमानेपन की पराकाष्ठा ही पार कर दी। इंतजाम का मुआयना करने के लिए कॉलेज पहुंचे चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री राधेश्याम सिंह एक तरफ कॉलेज प्रशासन को डॉक्टर और तीमारदारों पर अंकुश लगाने की नसीहत दे रहे थे तो दूसरी तरफ नेहरू अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में जूनियर डॉक्टर एक तीमारदार को पीट रहे थे।
नसीहत लेने के दौरान ही जब प्राचार्य के पास मारपीट की जानकारी देने के लिए कॉल आई तो उन्होंने आनन-फानन में मंत्री के निरीक्षण का रुख ही बदल दिया और वे मेडिसिन वार्ड का मुआयना नहीं कर सके।
मंत्री राधेश्याम सिंह तय कार्यक्रम के मुताबिक दोपहर बाद कॉलेज परिसर पहुंचे और सबसे पहले प्राचार्य और विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की।
इस दौरान राज्य मंत्री का पूरा जोर इसपर रहा कि आए दिन होने वाली डॉक्टर-तीमारदारों में मारपीट की घटना पर रोक लगाई जाए। उन्होंने गड़बड़ी पैदा करने वाले लोगों के बारे में जानकारी होने की बात भी कही, हालांकि किसी का नाम नहीं लिया। इसके बाद उन्होंने ट्रामा सेंटर से मुआयना शुरू किया।
अभी वो डायलिसिस यूनिट ही पहुंचे थे कि प्राचार्य के मोबाइल फोन पर किसी ने जानकारी दी कि मेडिसिन वार्ड नंबर 14 में जूनियर डॉक्टर एक तीमारदार की पिटाई कर रहे हैं।
यह सुनकर प्राचार्य के होश उड़ गए और उन्होंने राज्य मंत्री को वहां ले जाने की योजना तत्काल कैंसल कर दी और उन्हें लेकर इंसेफलाइटिस वार्ड की ओर चले गए।
राज्यमंत्री मुआयना करके चले गए लेकिन उन्हें इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उनकी उपस्थिति में ही नसीहत तार-तार हो रही थी। दरअसल जूनियर डॉक्टरों ने वार्ड का गेट बंद कर तीमारदार की पिटाई महज इसलिए कर दी थी कि वह अपने मरीज की मौत के बाद डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा रहा था।