जिला अस्पताल में एक बार फिर दवाओं का संकट गहरा गया है। दर्द, हार्ट, शुगर जैसी बीमारियों की दवाएं खत्म हो चुकी हैं। वहीं कई दवाएं खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। इंसेफेलाइटिस मरीजों को झटके आने पर दिए जाने वाली दवा भी स्टॉक में नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने समय रहते ही दवाओं का ऑर्डर भी भेजा, रिमाइंडर भी, मगर दवाएं नहीं आ सकीं। अब दवा सप्लाई करने वाली कंपनी के खिलाफ महानिदेशालय को पत्र लिखने की तैयारी की जा रही है।
जिला अस्पताल में एक महीने पहले दवाओं के खत्म होने का सिलसिला शुरू हुआ। पहले दर्द का इंजेक्शन खत्म हुआ तो अब एक-एक दवाएं खत्म होती जा रही हैं। बीपी, हार्ट, शुगर की दवाएं आउट ऑफ स्टॉक हो चुकी हैं। चूंकि शुगर और बीपी दो ऐसे मर्ज हैं, जिनकी दवाएं नियमित रूप से चलती हैं। ऐसे में मरीजों को सांसत झेलनी पड़ रही है। अब तक अस्पताल से नि:शुल्क दवाएं पा रहे लोगों को जब काउंटर से लौटाया जा रहा है तो वे शिकायत लेकर एसआईसी के पास पहुंच रहे हैं। मगर उनकी मजबूरी यह कि जब दवाएं स्टोर में ही नहीं है, तो दिलाए कहां से।
बदलते मौसम में सिरप खत्म
बड़ों के साथ ही बच्चों की दवाएं भी अस्पताल में खत्म हो चुकी हैं। बुखार में दी जाने वाली पैरासिटामॉल सिरप खत्म है तो एंटीबॉयोटिक भी मौजूद नहीं है। अब बच्चों को या तो टैबलेट दिए जा रहे हैं या उनके अभिभावकों को दवा बाहर से लेने की सलाह दी जा रही है।
कुछ दवाएं खत्म हुई हैं। कम होने पर ही करीब दो महीने पहले ही ऑर्डर भेजी जा चुकी है। मगर दवाएं नहीं आईं, रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। दवा सप्लाई करने वाली कंपनी की लापरवाही से मरीजों को परेशानी हो रही है। कंपनी के खिलाफ निदेशालय को पत्र लिखा जाएगा।
- डॉ. एचआर यादव, एसआईसी