एमबीबीएस की 50 सीटों को बचाने की मेडिकल कॉलेज की परीक्षा के रिजल्ट का वक्त आ गया है। मानक पर खरा उतरने की कोशिश में जुटे कॉलेज प्रशासन में बेचैनी शनिवार को तब और बढ़ गई, जब खबर मिली कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की टीम सोमवार को फिर आ सकती है। जानकारी मिलते ही कॉलेज प्राचार्य ने रविवार को भी कॉलेज खोलने का निर्देश जारी कर दिया और सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों की मौजूदगी अनिवार्य कर दी।
दरअसल एमबीबीएस के 50 सीटों को बचाने की चुनौती मेडिकल कॉलेज के सामने तभी से है, जब 2012 में कॉलेज के दावे पर इन सीटों को एमसीआई ने 50 से 100 कर दिया था। एमसीआई ने मेडिकल कॉलेज को 100 सीटों के मानक को पूरा करने के लिए तीन साल का वक्त दिया। इसके बाद साल में दो बार एमसीआई अपनी टीम मानक की पड़ताल के लिए भेजता रहा और टीम हर बार कमियां गिनाती रही। कमियों के चलते मान्यता रद्द करने की एमसीआई ने संस्तुति करते हुए भारत सरकार के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय को भी चिट्ठी भेज दी। उन्हीं कमियों को दूर करने की तस्दीक करने एमसीआई टीम एक बार फिर आ रही है लेकिन इस बार फैसले का वक्त है।
एमसीआई की यह तेजी आने वाले समय में सीपीएमटी एग्जाम को लेकर भी है, जिसके लिए फॉर्म जारी होने से पहले सीटों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
नहीं मिले तीन विभागों के प्रोफेसर
एमसीआई ने पिछले मुआयने के दौरान कॉलेज में शिक्षकों की संख्या में 19.25 प्रतिशत की कमी बताई थी, जबकि 10 प्रतिशत की कमी को ही ओवरलुक किया जा सकता है। कॉलेज प्रशासन ने काफी मशक्कत के बाद ज्यादातर विभागों में शिक्षकों की कमी को दूर करने की कोशिश की। लेकिन माइक्रोबायोलॉजी, फॉर्माकोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री के लिए अभी तक प्रोफेसर नहीं मिले हैं। प्राचार्य राजीव मिश्र का कहना है कि ज्यादातर कमियों को दूर करने की कोशिश की गई है लेकिन यह एससीआई के मानक पर खरा उतरे, तभी कुछ कहा जा सकता है।