मतदान केंद्र के बाहर वोटर लिस्ट में नाम ढूंढ़ते मतदाता।
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पुनरीक्षण अभियान के दौरान बीएलओ की मनमानी का खामियाजा तमाम वोटराें को मतदान से वंचित हो कर उठाना पड़ा। बूथों पर पहुंचने पर किसी को मृतक बता दिया गया तो किसी को विलोपित। तमाम मृतकों के नाम अभी भी वोटर लिस्ट में मौजूद हैं और कई जिंदा लोगों को मतदाता सूची में श्रद्धांजलि दे दी गई। कंट्रोल रूम से लेकर सेक्टर मजिस्ट्रेट समेत कई अफसरों से शिकायत के बाद भी जब कोई नतीजा नहीं निकला तो सैकड़ों वोटर जिला प्रशासन को कोसते हुए घर लौट गए। सभी की एक ही प्रतिक्रिया थी कि इस तरह से तो वोट प्रतिशत बढ़ चुका। जो नागरिक जागरूक हैं, उन्हें भी प्रशासन की लापरवाही की वजह से बूथों से बिना वोट डाले लौटना पड़ा।
ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के खोखर टोला निवासी 85 वर्षीय मेराज मारवाड़ इंटर कॉलेज में वोट डालने पहुंचे तो उन्हें मृतक बता दिया गया। उनका कहना था कि उनके पास वोटर कार्ड है, उन्हें वोटर पर्ची भी मिली और 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने मतदान किया था मगर उन्हें वोट नहीं डालने दिया गया। इसी तरह खोखा टोला के ही मुर्तजा, करम हुसैन, निजामुद्दीन, कासिफ, मो. इब्राहिम समेत दर्जन भर लोगों को मतदाता सूची में विलोपित (जिला छोड़ दिया) बताया गया था जबकि उनके पास वोटर कार्ड भी था और उन्हें वोटर पर्ची भी मिली थी। वहीं सिक्टौर के प्राथमिक विद्यालय में परदेशी के अलावा दो भाई बुद्धि सागर और शुद्धि सागर भी बीएलओ की लापरवाही की वजह से वोट नहीं डाल पाए।
मतदाताओं के नाम कटने पर भड़के आरएमडी
दाउदपुर स्थित मतदान स्थल पर पहुंचे नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने डीएम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कई मतदाताओं के नाम कटने की शिकायत पर उन्होंने डीएम को सपा प्रतिनिधि बता दिया। इससे कुछ देर तक मतदान केंद्र पर गहमागहमी बनी रही। प्रशासनिक अफसरों के पहुंचने पर उनसे तीखी नोकझोंक भी हुई। बाद में मौजूद लोगों के समझाने पर नगर विधायक वहां से चले गए। शहर में कई मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब थे। कई के पास वोटर कार्ड तो थे, मगर लिस्ट में नाम न होने पर उन्हें मतदान से रोक दिया गया। इसी बीच दाउदपुुर बूथ पर नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल पहुंच गए तो उनसे लोगों ने अपनी शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद वह भड़क गए और बीएलओ पर नाराजगी जाहिर करने लगे। कहा कि जानबूझकर प्रशासनिक अफसरों ने उनके वोटरों का नाम लिस्ट से काट दिया है। बहस की सूचना पर प्रशासनिक अफसर भी पहुंच गए और नगर विधायक को समझाने लगे। थोड़ी देर बाद विधायक वहां से लौटे तो मामला शांत हो सका।