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करोड़ों की इमारतों पर लोकार्पण के बाद भी ताला

Mon, 23 May 2016 08:45 PM IST
डॉ. राकेश राय, अमर उजाला, गोरखपुर।
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यूनिवर्सिटी में बना कैंटीन का भवन। - फोटो : shivharsh
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन परिसर में बिना धरोहर के ही पूर्वांचल संग्रहालय के लोकार्पण के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में खड़ी ऐसी सभी इमारतों पर सवाल उठ गया है, जिन पर लोकार्पण के बाद भी ताला लगा हुआ है। इस्तेमाल के इंतजार में खड़ी ऐसी आधा दर्जन इमारतें यूनिवर्सिटी प्रशासन की उदासीनता की बानगी हैं। इमारतों पर ताला पड़े रहने की वजह की जब पड़ताल की गई तो कई गंभीर तथ्य सामने आए।
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कुछ इमारतें लोकार्पण होने के बाद भी अभी यूनिवर्सिटी को निर्माण इकाई द्वारा सौंपी नहीं गई हैं तो कुछ को शुरू करने के लिए यूनिवर्सिटी के पास अभी संसाधन ही नहीं हैं। बिना तैयारी के आखिर इन इमारतों का लोकार्पण क्यों कर दिया गया? इस सवाल का यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास कोई ठोस जवाब नहीं है। 

भवन जो इस्तेमाल नहीं हो रहे
1. साइंस म्यूजियम भवन 
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के बजट से बने चार करोड़ के इस भवन को बनाने की पीछे यूनिवर्सिटी प्रशासन की मंशा विज्ञान के विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर शैक्षणिक संसाधन मुहैया कराना है। इन्हीं उम्मीदों के साथ तत्कालीन कुलपति प्रो. त्रिवेदी ने 20 सितंबर को इसका शिलान्यास किया। 2015 में यह बनकर तैयार भी हो गया, लेकिन यह भवन सिर्फ इमारत बन कर रह गया है, म्यूजियम नहीं बन सका। 
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2. मूट कोर्ट
लॉ डिपार्टमेंट परिसर में 42 लाख की लागत से बनी इस इमारत का अपना अलग किस्सा है। राज्य सरकार की धनराशि से बने इस भवन के लिए रकम देने का एलान 2013 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। राज्य सरकार के धन से राजकीय निर्माण निगम ने इसे तैयार तो कर दिया, लेकिन अभी तक इसे यूनिवर्सिटी को सुपुर्द नहीं किया है। इस इमारत का शिलान्यास भी तत्कालीन कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी ने सात जुलाई 2013 को किया था। 

3. पूर्वांचल संग्रहालय
समाजवादी चिंतक स्व. मोहन सिंह की सांसद निधि से प्रशासनिक भवन परिसर में बना पूर्र्वांचल संग्रहालय पिछले सप्ताह सांसद जया बच्चन और डिंपल यादव द्वारा लोकार्पित तो हो गया लेकिन उस दिन के बाद ही उस पर ताला जड़ा हुआ है। दो करोड़ की लागत से बने इस संग्रहालय को बिना धरोहर ही लोकार्पित करने की यूनिवर्सिटी प्रशासन की क्या मजबूरी थी, इस सवाल का सीधा जवाब देने यूनिवर्सिटी के अधिकारी बच रहे हैं। 

4. बहुद्देशीय हॉल भवन
यूनिवर्सिटी के एक करोड़ 20 लाख रुपये से प्रशासनिक भवन के बगल में बने बहुद्देशीय हाल का हाल तो और खराब है। दो साल पहले ही लोकार्पित भवन में मौजूद गंदगी यह बयां कर रही है कि यह बहुद्देशीय भवन किसी एक उद्देश्य के लिए भी इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यूनिवर्सिटी सूत्रों के मुताबिक इसमें स्टेट बैंक की शाखा खोले जाने की योेजना बनी थी लेकिन यह महज योजना तक ही रह गई, हकीकत नहीं बन सकी। 

5. क्रीड़ा कौशल केंद्र
सवा करोड़ की लागत से बने इस केंद्र का लोकार्पण एक दिसंबर 2015 में ही हो गया लेकिन अभी तक यह पूरी तरह से कौशल केंद्र के रूप में विकसित नहीं हो सका। इस केंद्र का ताला तभी खुलता है जब क्रीड़ा परिषद को किसी विशेष आयोजन की जरूरत होती है। यूनिवर्सिटी के धन से बना यह भवन लोकार्पण के समय से खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा देने की उम्मीद जगाए हुए है लेकिन साल भर बाद भी सुविधा मुहैया नहीं हो सकी है। 

6. कैंटीन भवन 
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की घोषणाओं में शामिल योजनाओं की कड़ी का यह कैंटीन भवन भी निर्माण के बाद शुरू नहीं हो सका। पिछले साल से ही तैयार यह भवन अभी तक यूनिवर्सिटी के सुपुर्द नहीं हो सका है। इसकी वजह निर्माण इकाई को धन का भुगतान न होना बताया जा रहा है। यूनिवर्सिटी सूत्रों के मुताबिक सुपुर्दगी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन यह प्रक्रिया अंतिम रूप कब लेगी, यह बड़ा सवाल है। 

यूनिवर्सिटी में बिना इस्तेमाल खड़े भवन हमारी भी चिंता का विषय है। सभी भवनों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने में आ रही अड़चनों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। एक जून को होने वाली विकास समिति की बैठक में इन्हें शुरू करने को लेकर चर्चा की जाएगी। 
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- प्रो. अशोक कुमार, कुलपति, गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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