महायोगी गोरखनाथ के बिना भारत
की आध्यात्मिक परंपरा अधूरी: योगी
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ के बिना भारत की आध्यात्मिक परंपरा अधूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु गोरखनाथ की मान्यता भारत के साथ ही पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश तथा म्यांमार में भी है। देश में कोई भी प्रांत ऐसा नहीं है, जहां महायोगी गोरखनाथ की परंपरा विद्यमान नहीं है।
हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार में बृहस्पतिवार को युग प्रवर्तक महायोगी गोरखनाथ पर आधारित तीन दिवसीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी के कवि सुमित्रानंदन पंत ने ओशो से जब आध्यात्म के बारे में पूछा तो, ओशो ने कहा था कि गोरखनाथ के बगैर भारत की आध्यात्मिक परंपरा शून्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पिछले 25 वर्ष से इस परंपरा से जुड़े हैं। गुरु गोरखनाथ ही नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक थे, उन्हें शिव स्वरूप माना गया है। उनकी उपस्थिति इतिहास और साहित्य की दृष्टि में अलग-अलग कालखंड में है। उत्तराखंड की जागर परंपरा भी गोरखनाथ से संबंधित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि त्रिपुरा में 35 प्रतिशत आबादी गोरखनाथ के अनुयायियों की है। असम की 15 प्रतिशत आबादी गोरखनाथ की अनुयायी है।
पेशावर में होती है यात्रा
मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंगापुर से एक सिख परिवार उनसे गोरखपुर मिलने आया। उस परिवार ने बताया कि वह पाकिस्तान में ननकाना साहिब में माथा टेकने गया था। वहां उसने देखा कि पेशावर के पास पहाड़ी पर महायोगी गोरखनाथ को लेकर यात्रा होती है। गोरखनाथ से जुड़ाव पाकिस्तान में भी हैं।
नेपाल में मेघों को बांध दिया था
मुख्यमंत्री ने बताया कि नेपाल के काठमांडू में मृगस्थली में एक समय राजा बौद्ध हो गए थे। तब गोरखनाथ खुद नेपाल गए तो राजा ने उनकी उपेक्षा की। तब गुरु गोरखनाथ ने वहां मेघों को बांध दिया था। नेपाल में तब 12 वर्ष बारिश नहीं हुई थी। तब राजा ने माफी मांगी। आज तक इसको लेकर वहां हर वर्ष बड़ा आयोजन होता है। 10 वीं शताब्दी में नवीन नेपाल की स्थापना गुरु गोरखनाथ ने की थी। वहां अभी भी गुरु के नाम से मुद्रा है।
वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा को सिद्ध करती है गोरखनाथ की शिक्षा - निशंक
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि देश ही नहीं बल्कि विदेशों में प्रचलित महायोगी गोरखनाथ की शिक्षाएं भारतीय वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा को भी सिद्ध करती है।
केन्द्रीय मंत्री निशंक ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ जैसे महान व्यक्तित्व पर संगोष्ठी का आयोजन किया जाना प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से ही तन व मन को स्वस्थ रखा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से योग को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।