महावीर जूट मिल: डिस्कॉम से मिली ओपन एक्सेस की स्वीकृति
गोरखपुर। महावीर जूट मिल के निदेशक और गोरखपुर के प्रमुख उद्योगपति प्रमोद कुमार मसकरा को आखिरकार शनिवार को ही दूसरे राज्य से बिजली खरीदने की अनुमति मिल गई। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डिस्कॉम) वाराणसी में तैनात अफसरों ने एक महीने से लटकी फाइल को चंद घंटों में ही मंजूरी दी और स्टेट लेवल डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) लखनऊ को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दी। अब मुख्यालय से अंतिम मुहर लगेगी।
आपको बता दें कि उद्योगपति एक महीने से वाराणसी मुख्यालय के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन उनकी फाइल पर अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं हो पा रहे थी। इस मामले को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उठाया। इसका संज्ञान आला अफसरों ने लिया और समस्या का त्वरित समाधान कर दिया। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ने इस मामले में जांच के आदेश भी दिए हैं।
महावीर जूट मिल के निदेशक और उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की सलाहकार समिति के सदस्य प्रमोद कुमार मसकरा ने ओपन एक्सेस के तहत दमन एवं दीव से बिजली खरीदने की अनुमति मांगी थी। इसके लिए डिस्कॉम के लखनऊ मुख्यालय में आवेदन दिया था। इससे संबंधित फाइल पिछले एक महीने से घुमाई जा रही थी। मुख्यालय और गोरखपुर स्तर से फाइल निकली तो डिस्कॉम वाराणसी में फंसा दी गई। कहा गया कि अपने खंभे और तार लगवाएं, फिर अनुमति मिलेगी। इससे उद्योगपति परेशान हो गए। साथ ही बेलगाम नौकरशाही के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। सात दिसंबर के अंक में ‘दस्तखत के लिए एक महीने से घूम रही है फाइल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई तो तो हड़कंप मच गया। पूरे मामले की सूचना लखनऊ से तलब की गई। आनन-फानन में ही डिस्कॉम वाराणसी से फाइल पर अंतिम मुहर लगाकर आगे भेजी गई। इसपर उद्योगपति ने खुशी जताई। साथ ही कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम गोरखपुर की ओर से काफी सहयोग रहता है। बस, दिक्कत वाराणसी मुख्यालय से है। वहां सभी चीजों को लेकर काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। इस समस्या को अमर उजाला ने प्रभावी तरीके से उठाया। इसके लिए धन्यवाद देता हूं। लंबे समय से दौड़भाग कर रहा था लेकिन निराशा मिली थी। अब न्याय मिला है।
गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, होगी जांच
पीके मसकरा गोरखपुर के बड़े उद्यमी हैं। उनकी ओर से ओपन एक्सेस के लिए दिए गए आवेदन के निस्तारण में देरी हुई है। शनिवार को मामला संज्ञान में आते ही उनकी ओर से ओपन एक्सेस के लिए दिए गए आवेदन को स्वीकृति देते हुए मामले को स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) लखनऊ के पास भेज दिया गया है। मैं, खुद ही इस संबंध में पीके मसकरा से बात करूंगा। गड़बड़ी किस स्तर पर हुई है। इस बात की जांच कराई जाएगी। दरअसल विभाग में किसी भी कार्य की शुरुआत जेई स्तर से होती है। ऐसे में संभव है कि किसी स्तर पर फाइल लंबित पड़ी रह गई हो। मामले की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी। जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- के. बालाजी, एमडी, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड