महंत आदित्यनाथ ने संत सभा की चिंतन बैठक के लिए शनिवार को कार्यालय का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि संत सभा की चिंतन बैठक हिंदू समाज को संगठित करने में मील का पत्थर साबित होगी। आत्म संशोधन एवं परिष्कार हिंदू संस्कृति की विशेषता रही है। समय-समय पर धर्माचार्यों ने धार्मिक सामाजिक सांस्कृतिक, मूल्यों एवं परंपराओं पर विचार कर उसे समय के अनुरूप बनाया है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता राष्ट्रवाद की अनिवार्य शर्त है। हमें अपने देश से छुआ-छूत, ऊंच-नीच की खाई को समाप्त करने संकल्प लेना पड़ेगा। धर्म जागरण मंच के बिहार क्षेत्र के संगठन मंत्री सूबेदार ने कहा कि देश की एकता अखंडता बनाए रखने के लिए संत गोरखपुर आ रहे हैं। यहां के लोगों का सौभाग्य है कि संपूर्ण देश के संतों का आतिथ्य स्वीकार्य करने का अवसर मिलेगा।
बैठक में रामलखन, महंत रविंद्र दास, राघवेंद्र प्रताप सिंह, सुनील सिंह, कामेश्वर सिंह, रामलक्ष्मण, अरूणेश शाही, धर्मेद्र सिंह, भिखारी प्रजापति, सीताराम जायसवाल सहित कई लोग उपस्थित थे।