सपा सरकार की महत्वाकांक्षी लोहिया आवास योजना के तहत जिले में बनाए गए अधिकांश मकान अंधेरे में डूबे हुए हैं। उजाले के लिए सोलर लाइट लगाए जाने हैं। मगर अभी तक वित्तीय वर्ष 2014-15 में लगाए जानी वाली सोलर लाइटों का बजट मंजूर ही नहीं हो पाया है।
गरीबों को छत मुहैया कराने के मकसद से सपा सरकार ने लोहिया आवास योजना शुरू की थी। लाभार्थियों के चयन के पश्चात मंडल में करीब आठ हजार लोगों को योजना लाभ दिया गया है। नतीजतन जो भवन बनाए गए हैं। उनमे से अधिकांश आबादी से दूर और ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। बिजली व्यवस्था को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति दयनीय है। दो-तीन दिन बिजली नहीं आती है। अगर कहीं फाल्ट हो जाए तो हफ्ते-हफ्ते भर बिजली गायब रहती है। लिहाजा लोहिया आवासों में रात का अंधेरा दूर करने के लिए सोलर लाइट लगाए जाने हैं। मगर इसके लिए वित्तीय वर्ष 2014-15 का बजट मंजूर नहीं हो सका है।
अब बरसात का मौसम भी शुरू हो चुका है। इन दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में सांप, बिच्छु सहित कई तरह के जहरीले कीड़े निकलने लगते हैं। सर्पदंश से मरने वालों की संख्या भी इन्हीं दिनों में बढ़ जाती है। बावजूद इसके लोहिया आवासों में उजाले की व्यवस्था नहीं हो पाई है।
यह बात सही है, लोहिया आवासों में सोलर लाइटें नहीं लगी हैं। अभी तो वित्तीय वर्ष 2014-15 में जिन आवासों का चयन हुआ था, उसमें सोलर लाइट लगनी है। दरअसल सरकार की तरफ से चयनित सप्लायर 70 प्रतिशत भुगतान मांगता है। जबकि राज्य सरकार कुल लोहिया आवासों के हिसाब से 10 प्रतिशत बजट ही देती है। ऐसे में सोलर लाइटें कैसे लग सकती हैं? राज्य सरकार से और बजट मांगा गया है।
- सीताराम सिंह, परियोजना अधिकारी, वैकल्पिक ऊर्जा विकास संस्थान उ.प्र. (नेडा)
लोहिया आवासों में अंधेरा नहीं होना चाहिए। बरसात के मौसम को देखते हुए अतिशीघ्र इन आवासों में सोलर लाइटें लग जाएगी।
- गोविंद लाल श्रीवास्तव, संयुक्त विकास आयुक्त, गोरखपुर मंडल