बस्ती में खेत में पुआल जलाने के चलते दो मासूम जिंदा जल गए। गुरुवार को इस हृदयविदारक घटना का कारण बनी ये आग जिले के तमाम क्षेत्रों में भी धधक रही है। इन लपटों के बीच में जो भी आता है स्वाहा हो जाता है। इस आग में कभी मवेशी या दूसरे जानवर जल जाते हैं, मगर इस बार दो मासूम जिंदा जल गए। खाली खेतों में दहकता पुआल कई तरह से जिंदगी को राख कर देता है।
गेहूं के सीजन में इस आदत ने कई गांवों को खाक कर दिया था। कई बार हादसों का सबब बन चुकी इस आदत से प्रकृति एवं पर्यावरण को भी गहरा नुकसान हो रहा है। फुंकते खेतों का जीवांश कार्बन जलकर नष्ट हो जा रहा है तो कई मित्र कीट एवं लाभकारी बैक्टीरिया भी। ह्यूमस (खाद मिट्टी) के सुलग जाने से खेत बंजर हो रहे हैं। पर्यावरणविद इस कुप्रवृत्ति के व्यापक दुष्परिणाम बताते हुए लोगों को चेतावनी दे रहे हैं। कृषि और पर्यावरण के जानकार कह रहे हैं कि अगर हम अब भी न चेते तो परिणाम बेहद त्रासद होंगे।
भ्रम में डूबे हैं किसान
फरेंदा खुर्द के किसान जीतेंद्र ने कंबाइन से धान कटवाया है। गुरुवार को धान की ढुलाई के बाद उनकी योजना शुक्रवार को खेत में बचे डंठल जलाने की थी। पूछने पर बताया कि सुना है इससे खेतों की उर्वरता बढ़ती है। दरअसल, यह केवल जीतेंद्र की सोच नहीं है बल्कि बहुसंख्यक किसान ऐसा ही मानते हैं। हाल के सालों में कंबाइन कल्चर के तेजी से विस्तार के बीच इसी भ्रम के चलते खेतों में डंठल जलाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। किसान ये जानकर कि इससे खेतों का भला होगा, वो डंठल खेतों में ही फूंक रहे हैं।
खत्म हो रहे मित्र कीट
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सीपीएम त्रिपाठी बताते हैं कि खेतों में डंठल जलाने से मृदा में मौजूद ह्यूमस जलकर नष्ट हो जाता है। इससे माटी की जलधारण क्षमता घटती है और वो बंजर हो जाती है। मिट्टी में मौजूद विभिन्न पोषक तत्व भी जलकर नष्ट हो जाते हैं। मृदा में मौजूद कार्बन, नाइट्रोजन, सल्फर, क्लोरीन, हाइड्रोजन और आक्सीजन जैसे तत्व धुआं बनकर उड़ जाते हैं। इस आग में फंसकर खेतों में रहने वाले मित्र कीट और जीव भी जल जाते हैं। जैसे फसल को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों को खाने वाले सांप खेत के बिल में ही झुलस जाते हैं।
धुआं बन रहे पोषक तत्व
छह माइक्रो न्यूट्रीएंट (बोरॉन, जिंक, मॉलिब्डेनम, मैगनीज, कॉपर, क्लोरीन) और 10 मैक्रो न्यूट्रीएंट (कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, फास्फोरस, पोटैशियम, नाइट्रोजन, सल्फर, मैगनीशियम, आइरन, कैल्शियम) आग के चलते आक्साइड बनकर उड़ जाते हैं। इनमें एनपीके यानी नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम को फसलों का प्रमुख पोषक तत्व माना जाता है। खेतों में डंठल जलाने की प्रवृत्ति से ये तत्व तेजी से नष्ट हो रहे हैं। इस आदत के चलते खेत तेजी से बंजर होने की राह पर हैं।
आग से क्या है नुकसान
- जमीन में मौजूद प्रमुख पोषक जीव (माइक्रोऑर्गेनिज्म) जैसे विभिन्न प्रकार के लाभकारी बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं।
-उपजाऊ ह्यूमस नष्ट होती है।
-पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ता है।
-मित्र कीट नष्ट होते हैं।
-जीवांश कार्बन नष्ट हो रहा।
-राख खेतों का पीएच वैल्यू बर्बाद कर खेतों को क्षारीय कर देता है।