फॉर्मेसी के लाइसेंस पर खुली दुकान में घी-तेल और कपड़ा बेचे जाने का मामला समाने आया है। शासन के निर्देश पर हुई जांच में पर्दाफाश होने के बाद ऐसी चार दुकानों का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। वहीं छह दुकानों पर फॉर्मासिस्ट नहीं मिलने पर उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
दवा की दुकानों की जांच के लिए शासन ने नई पहल की है। नई नीति के तहत हर महीने दस मेडिकल स्टोरों की विशेष जांच के लिए गोपनीय पत्र भेजा जा रहा है। इसके पीछे शासन की मंशा है कि अक्सर ग्रामीण इलाकों में दवा की दुकानों की जांच नहीं हो पाती है और वहां लाइसेंस की आड़ में कई फर्जी काम किए जाते हैं। पिछले महीने शासन ने जांच के लिए दवा की दुकानों की सूची भेजी थी। ड्रग इंस्पेक्टर ने जब उनकी जांच की तो चौंकाने वाला मामला सामने आया।
अंधियारीबाग में तनू मेडिकल स्टोर में घी-तेल का कारोबार होता पाया गया। कुछ दवाएं भी साथ में रखी थीं। वहीं गाजीरौजा स्थित केडी एजेंसी पर जब टीम पहुंची तो वहां पर कपड़े का व्यापार हो रहा था। दवा का लाइसेंस मात्र ही था। इसी तरह गढ़वा मुडेर स्थित शक्ति औषधालय, खजनी रोड स्थित विजय मेडिकल स्टोर की दुकान बंद मिली। आसपास के लोगों ने जानकारी दी कि यह दुकानें कभी-कभार ही खुलती हैं। इन दुकानों का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। वहीं छह अन्य दुकानों की जांच में फॉर्मासिस्ट नहीं मिले, तो उन्हें नोटिस जारी किया गया है।
‘दवा की दुकानों की जांच की गई थी। इसमें मिली कमियों की रिपोर्ट सहायक आयुक्त को भेजी गई थी, जिसके बाद कार्रवाई हुई है, आगे भी अभियान जारी रहेगा।’
- बृजेश यादव, ड्रग इंस्पेक्टर