नौसड़-कालेसर मार्ग पर जलती एलईडी लाइट।
- फोटो : Amar Ujala
वर्षों से अंधेरे में डूबा नौसड़-कालेसर मार्ग शनिवार को एलईडी लाइटों से जगमग हो गया। गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने ट्रायल के तौर पर इन्हें जलाया। 29 को दो दिवसीय दौरे पर आ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस योजना का लोकार्पण करेंगे, जिसके बाद लाइट रोजाना जलेगी। करीब आठ किलोमीटर लंबे इस मार्ग को रोशन करने में 3.39 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।सितंबर 2017 के अंतिम सप्ताह में एलईडी लाइटें लगाने का काम शुरू हुआ था। छह महीने में इस योजना का पूरा करना था मगर जीडीए ने इसे चार माह में ही पूरा कर लिया।
जीडीए ने करीब 10 दिन पहले ही काम पूरा कर लिया था। कनेक्शन के लिए विद्युत सुरक्षा विभाग की तरफ से सर्टिफिकेट मिलते ही कनेक्शन जोड़ दिया गया। ट्रायल में सभी लाइटें सही मिलीं। कुछ पोल की पेंटिंग का काम बाकी है। दो दिन में इसे भी पूरा कर लिया जाएगा।
: राम सिंह गौतम, जीडीए सचिव
आसान नहीं रहा स्ट्रीट लाइट योजना का सफर
करीब तीन साल पहले पैडलेगंज-कालेसर फोरलेन का काम पूरा होने के साथ ही इस पर स्ट्रीट लाइटें लगाने की योजना बनी थी। तय हुआ था कि जीडीए यह काम कराएगी। मगर नौसड़ तक ही जीडीए की सीमा होने की वजह से प्राधिकरण ने उसके आगे, यानी कालेसर तक लाइटें लगाने से हाथ खड़े कर दिए। तय हुआ कि पैडलेगंज से नौसड़ तक जीडीए और नौसड़ से कालेसर तक गीडा लाइटें लगाएगा। मगर फंड नहीं होने का हवाला देते हुए गीडा के तत्कालीन सीईओ ज्ञान चंद्र त्रिपाठी ने लाइटें लगाने से हाथ खड़े कर दिए। जीडीए ने अपनी सीमा के भीतर नौसड़ तक लाइटें लगा दीं। नौसड़ से कालेसर तक का मामला किसी तरह सुलझने के बाद पिछले साल जीडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष ओएन सिंह ने टेंडर निकाला। बाद में अनियमितता के आधार पर उपाध्यक्ष वैभव श्रीवास्तव ने टेंडर खारिज कर दिया। दोबारा टेंडर निकाला गया, तब काम शुरू हुआ। इसी बीच यह काम देख रहे एक्सीईएन और उपाध्यक्ष आपस में भिड़ गए। हाल ही में बदसलूकी के मामले में एक्सईएन को सस्पेंड कर दिया गया।