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महिलाएं लड़वाती हैं.... कोई एक युद्ध बता दो जो पुरुषों की वजह से हुआ हो

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कुसम्ही स्थिति फॉर्म हाउस पर आयोजित कवि सम्मेलन में कबिता पाठ सुनते मोरारी बापू व अन्य।
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महिलाएं लड़वाती हैं.... कोई एक युद्ध बता दो जो पुरुषों की वजह से हुआ हो
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गोरखपुर। रामकथा के छठवें दिन गुरुवार देर शाम कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। मोरारी बापू की मौजूदगी में व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर और पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने देर शाम हास्य और व्यंग्य के जमकर तीर चलाए। उनकी हर कविता पर श्रोता लोटपोट हो गए और तालियों से उनका अभिवादन किया। उन्होंने न केवल देश, समाज, जीवन और राजनीति की कड़वी सच्चाई पर प्रहार कर लोगों को सोचने के लिए विवश किया बल्कि गुदगुदाया भी।
कुसम्ही स्थित फार्म हाउस पर बनी बापू की कुटिया में आयोजित कार्यक्रम में सुरेंद्र शर्मा ने .... महिलाओं की अहमियत पर प्रकाश डालते कहा कि ‘महिलाएं सिर्फ लड़वाती है, हमारा कोई लेना-देना नहीं होता। ‘एक भी युद्ध बता दो, जो पुरुषों की वजह से हुआ हो’। इतने के बाद भी महिलाएं न रहें तो जीवन का रंग खत्म हो जाता है। वर्तमान समय के पतियों की व्यंगात्मक व्याख्या करते हुए कहा कि पति तीन तरह के पाए जाते हैं। पहला बहादुर- वो अकेले मैं हूं, दूसरा गुलाम -जो सदा लुगाई के पीछे चलते हैं। तीसरा महागुलाम- जो बच्चा उठाकर चलता है। हरियाणा के बेटे को यूपी से श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि हरियाणा के बेटे बाप की बात मानते है। यूपी में नहीं मानते, चुनाव में हमने देखा है। यूपी के बेटे बात कैसे नहीं मानते। इस दौरान पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
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कवि सम्मेलन की शुरुआत युवा कवि दिनेश बावरा की हास्य कविताओं से हुई। मंच पर आते हैं दिनेश छात्र जीवन कोे याद करते हुए कहा कि हमारे समय में टूजी, थ्रीजी नहीं होता था। सिर्फ गुरुजी होते थे। एक ठूसा पड़ते ही हम तुरंत नेटवर्क में आ जाते थे। चुनाव के प्रसंग को याद करते हुए कहा कि एक बार अमित शाह ईवीएम पर वोट डालने गए तो ईवीएम ने पूछा साहब आपको आने की क्या जरूरत थी। आप इशारा करते हम खुद ही पड़ जाते.. सुना वाहवाही लूटी।
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पटियाला से आईं कवियित्री महक भारती ने .... प्रेम के कितने रूप है और कितने सारे रंग कविता सुना प्रेम महत्व को दर्शाया। इकबाल शहर ने नज्म ‘किसी को कांटो से चोट पहुंची, किसी को फूलों ने मारा’। ‘जो इस मुसीबत से बचे उन्हें उसूलों ने मारा डाला’ सुना समा बांध दिया। नीलोत्पल मृणाल ने कविता ‘मिट्टी के लोग हैं बाबू मिट्टी ही सदा उड़ाएंगे’। ‘मिट्टी के बने मिट्टी में सने फिर मिट्टी के हो जाएंगे’ कवि सम्मेलन को ऊंचाई प्रदान की।
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