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स्वीकार न करें तो खुद खत्म हो जाएगी अश्लीलता: कल्पना

Fri, 29 Jan 2016 09:50 PM IST
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
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भोजपुरी गीतों को जन-जन से जोड़ने की छटपटाहट के साथ मशहूर लोक गायिका कल्पना शुक्रवार को शहर में थीं। गोरखपुर महोत्सव में शामिल होने आईं कल्पना की यह छटपटाहट संवाददाताओं से बातचीत साफ दिखी। यही वजह है कि भोजपुरी गीतों और उनकी परंपराओं से जुड़े सभी सवालों के जवाब उन्होंने पूरी संजीदगी से दिए।
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सवाल : भोजपुरी गीतों में अश्लीलता को शामिल करना आपकी नजर में कितना जरूरी है?
कल्पना : गीतों में अश्लीलता की शिकायत करने वाले बहुत लोग हैं लेकिन उसे उस दायरे से बाहर निकालने के लिए कोई आगे नहीं आता। यदि लोग इसे स्वीकार न करें तो यह खुद-ब-खुद चलन से बाहर हो जाएगी।

सवाल : आप असम से है और आपने भोजपुरी में अपना मुकाम तलाशा। इसकी क्या वजह रही?
कल्पना : भूपेन हजारिका के गीत सुनकर बड़ी हुई। उनके गीत लोगों के बीच से होते थे। ऐसे में जब भोजपुरी में हाथ आजमाने अवसर मिला तो उनमें भी लोक आवाज का अहसास हुआ। सफलता मिली तो हौसला बढ़ गया।
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सवाल : लोकगीत की परंपरा इन दिनों बीट और रीमिक्स के बीच उलझ कर रह गई है। इसे आप कहां तक जरूरी मानती हैं?
कल्पना : लोकगीतों की परंपरागत धुन से छेड़छाड़ कतई ठीक नहीं। विशेष साज और आवाज ही इनकी पहचान है। मैंने भी बिरहा को लेकर एक प्रयोग किया है लेकिन धुन से कोई छेड़छाड़ नहीं की।

सवाल : नई पीढ़ी के भोजपुरी गायकों के बारे में आपका नजरिया क्या है?
कल्पना : जल्द लोकप्रियता हासिल करने के लिए ये गायक कोई भी रास्ता अख्तियार करने के लिए तैयार हैं, नतीजतन भटके हुए हैं। उन्हें लोकगीतों की परंपरा से जोड़ने की दिशा में काम कर रही हूं।

सवाल : बौद्धिक लोग भोजपुरी लोकगीतों को दोयम दर्जे का मानते हुए उससे दूर हो रहे हैं। ऐसा क्यों?
कल्पना : यह सही है कि भोजपुरी लोकगीत सुनने वालों में बौद्धिक लोगों की कमी हो गई है। दरअसल इन गीतों में ऐसे लोगों की मनोरंजन की खुराक पूरी नहीं मिलती। इसकी वजह गीतों से परंपरा का लोप होना है।  

सवाल : लोकगीत के क्षेत्र में क्या नया कर रही हैं?
कल्पना : वेस्टइंडीज टूर के दौरान वहां के भारतीय लोगों में मैंने बिरहा सुनने की ललक देखी, जबकि अपने ही देश में बिरहा लुप्त हो रहा है। ऐसे में ‘एंथोलॉजी ऑफ बिरहा’ नाम से सीडी रिकार्ड कर जन-जन तक उसे पहुंचाने का काम कर रही हूं। नाथ संप्रदाय से मेरा गहरा लगाव है, इसलिए अब गोरखबानी रिकार्ड करने की दिशा में भी काम कर रही हूं।
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