पश्चिम में सफलता के झंडे गाड़ने वाली पशुपालन विभाग की महत्वाकांक्षी कामधेनु योजना गोरखपुर में फ्लाप साबित हो रही है। ब्याज सरकार देने के लिए तैयार है, बावजूद इसके योजना में निर्धारित लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है।
जिले में पशुपालन विभाग के स्टाफ पर सरकार लाखों रुपये महीने व्यय कर रही है। पशुपालन और डेयरी उद्योग को बढ़ाव देने के लिए राज्य सरकार ने कामधेनु, मिनी कामधेनु और माइक्रो कामधेनु योजना पशुपालन विभाग के माध्यम से शुरू की है। कामधेनु योजना में एक करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से सौ गाय-भैंस, मिनी कामधेनु में 52 लाख की लागत से 50 गाय-भैंस और माइक्रो कामधेनु में 27 लाख रुपये की लागत से 25 गाय-भैंसों को लेकर डेयरी खोली जा सकती है।
योजना के तहत 25 प्रतिशत धनराशि डेयरी संचालक को लगाना होता है और बाकी 75 फीसदी की रकम विभाग पांच वर्ष के लिए बतौर बैंक से ऋण दिलाता है। इस पर जो ब्याज पड़ता है, उसे विभाग अदा करता है। इस तरह से डेयरी संचालक को 27 लाख, 13 लाख और सात लाख की करीब सब्सिडी विभाग को मिल जाती है। इस वर्ष विभाग को कामधेनु में एक, मिनी में दस और माइक्रो में 20 डेयरी का लक्ष्य विभाग को दिया गया था। इनमें से विभाग अभी तक डेयरी खोलने के लिए इच्छुक लोगों को ढूंढ नहीं सका है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कृष्ण प्रताप सिंह बताते हैं कि चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिया गया है, वह निर्धारित लक्ष्य को जल्द हासिल करें और डेयरी प्रोजेक्ट बना करके विभाग में सबमिट करें।