समाजवादी चिंतक, लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार रहे गुंजेश्वरी प्रसाद (85) का रविवार की शाम निधन हो गया। वे झंगहा क्षेत्र के राजी गांव में अपनी बेटी के पास रह रहे थे। देर रात उनका शव पैतृक गांव मिश्रौली पहुंचा तो आसपास के शोकमग्न लोग जुट गए।
महात्मा गांधी, डॉ. राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण की विचारधारा से प्रभावित गुंजेश्वरी प्रसाद का जन्म 13 मार्च 1936 को कौड़ीराम के मिश्रौली गांव में हुआ था। सन 1957 में स्नातक की डिग्री लेने के क्रम में ही अव्यवस्थाओं के विरोध के ख्याल ने उन्हें बड़े आंदोलनों की तत्कालीन धारा से जोड़ दिया। इसके चलते उन्हें 24 बार जेल की यात्रा करनी पड़ी।
बीमार प्रधानमंत्री हटाओ का नारा बुलंद करके 1964 में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू को काले झंडा दिखाए थे। इसके अलावा अंग्रेजी हटाओ आंदोलन (1960), दाम बांधो आंदोलन (1963), उत्तर प्रदेश बंद के आह्वान के आंदोलन (1966), भूमि बांटो आंदोलन (1969), इंदिरा हटाओ के साथ आपातकाल के विरोध (1970) में सक्रिय हिस्सेदारी की थी। उन्होंने कारगिल कंपनी के विरोध और मेरठ के माया त्यागी कांड पर पुलिस के खिलाफ भी जमकर आवाज मुखर की थी।
पुराने दौर की सभी अहम पत्रिकाओं और अखबारों में उनके आलेख प्रकाशित होते थे। साप्ताहिक हिंदुस्तान, धर्मयुग, कल्पना, जनमासिक-चैखंभा, सरिता, मुक्ता, यथावत, श्रीवर्षा, कादम्बिनी, ग्रामोत्थान-संवाद सहित कई दैनिक अखबारों में प्रभावी विषयों पर छपे उनके अनेक लेख सुर्खियों में रहे थे। दिल्ली से प्रकाशित दो पत्रिकाओं ‘एशियन डॉन’ और ‘इंद्रपस्थ इंटरनेशनल’ का संपादन भी किया था। उनकी एक पुस्तक ‘डॉ. राममनोहर लोहिया’ नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित हुई थी। मुखर लेखन और प्रभावी पत्रकारिता पर उन्हें कई पुरस्कार व सम्मान मिले।
वर्ष 1965 में सहअस्तित्व पर सोवियत भूमि पुरस्कार, नगालैंड कुलपति द्वारा नई दिल्ली में ‘रामधारी सिंह दिनकर सम्मान’, प्रेस क्लब बड़हलगंज में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर द्वारा सरयू रत्न सम्मान, चतुर्थ प्रहरी नजीबाबाद द्वारा सम्मान से नवाजा गया था। कहानियां और रूपक के साथ-साथ उन्होंने कविताएं भी लिखीं। जिस वक्त रेडियो का बोलवाला था, उस दौर में आकाशवाणी गोरखपुर से उनकी वार्ताओं का क्रम निरंतर था तो आकाशवाणी दिल्ली और नजीबाबाद से भी उनके साक्षात्कार प्रसारित हुए थे।