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पुराने गुनहगारों को माफी, नए पर शिकंजा

Thu, 08 Sep 2016 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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अारटीअाई
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सूचना का अधिकार कानून के तहत एक दशक तक जानकारी और जुर्माना न देने वाले ज्यादातर जन सूचना अधिकारियों (पीआईओ) पर अब कार्रवाई हो पाना मुमकिन नहीं है। एक्ट लागू होने के बाद से 11 सालों में बड़ी संख्या में पीआईओ ने जुर्माने की रकम नहीं चुकाई। गोरखपुर मंडल में ही ऐसे पीआईओ की संख्या तीन सौ से अधिक है। इनमें गोरखपुर जिले में ही 177 पीआईओ शामिल हैं। इनमें से कई अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं या फिर उनका तबादला हो चुका है।
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 दरअसल कानून के तहत अधिकतम 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान तो है, मगर इसकी वसूली को लेकर कोई व्यवस्था नहीं बन पाई थी। आरटीआई से जुड़ी चार दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ पर शहर आए मुख्य राज्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने खुद इस बड़ी खामी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि लापरवाही पर बिना सजा दिए इस कानून का पारदर्शिता के साथ पालन करा पाना मुमकिन नहीं है। यही वजह है कि जुर्माने की वसूली की जिम्मेदारी को सुनिश्चित किया जाना जरूरी पाया गया। नतीजतन उप्र सूचना का अधिकार नियमावली 2015 में जुर्माने की वसूली की जिम्मेदारी के संबंध में नियम बनाए गए।

उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनेगी जो इस काननू का उल्लंघन करने वाले अफसराें से जुर्माने की वसूली का काम देखेगी। राज्य सूचना आयोग में भी एक सेल गठित किया गया है, जहां जुर्माने के लिए फाइल भेजी जाती है। यह सेल संबंधित जन सूचना अधिकारी के नियंत्रक प्राधिकारी के साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी को भी फाइल भेजती है। कमेटी इसकी निगरानी करेगी कि दंडित जन सूचना अधिकारी से अर्थदंड की वसूली हुई या नहीं।  क्रांतिकारी अधिनियम है आरटीआई   मुख्य राज्य सूचना आयुक्त ने बड़ी ही साफगोई से कहा कि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जिस सोच के साथ सूचना का अधिकार कानून बनाया गया, वह पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पा रहा। इसका उद्देश्य शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करना था। इसे पूरा करने में कानून कुछ हद तक ही सफल हो पाया। उन्होंने कहा कि इनके बावजूद भी वह इसे एक क्रांतिकारी अधिनियम मानते हैं। क्रांति किसी भी यथास्थिति में बदलाव लाती है और आरटीआई ऐसा ही कर रहा है। किसी भी तरह की जानकारी न देने या बहाना बनाने पर जन सूचना अधिकारी या अपीलीय अधिकारी को कई बार सोचना पड़ता है। तमाम बड़े भ्रष्टाचार आरटीआई से ही खुले।
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...तो मान लिया जाएगा डीम्ड पीआईओ  कार्यशाला के दौरान कई पीआईओ ने एक्ट की दिक्कतों को मुख्य राज्य सूचना आयुक्त से साझा किया। एक पीआईओ ने कहा कि अक्सर ऐसा होता है कि जिस पटल से जुड़ी सूचना होती है, उससे बार-बार के पत्राचार के बाद भी उक्त अफसर जानकारी नहीं देते। चूंकि जन सूचना अधिकारी की जिम्मेदारी उनके पास नहीं होती लिहाजा वे इसलिए भी रुचि नहीं दिखाते की कार्रवाई होगी भी तो जन सूचना अधिकारी के खिलाफ। इसपर मुख्य राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि ऐसा नहीं है कि वे कार्रवाई से बच जाएंगे। सूचना जिस भी अफसर के पटल से संबंधित है, उसे जन सूचना अधिकारी को मुहैया कराने की जिम्मेदारी भी उसी की है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें डीम्ड पीआईओ मान लिया जाएगा और उनपर कार्रवाई की जाएगी।   बहाना भूल सूचना देने में ही पीआईओ की बेहतरी: जावेद उस्मानी मुख्य राज्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने कहा कि जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदक द्वारा मांगी गयी सूचना को देना प्रत्येक जन सूचना अधिकारी का दायित्व है। कोई भी अधिकारी केवल विधिक आधार पर ही सूचना देने से इंकार कर सकता है। मगर आवेदक द्वारा आयोग में अपील करने की दशा में संबंधित जन सूचना अधिकारी को सूचना न देने का कारण तथ्यों के साथ स्पष्ट करना पड़ेगा, नहीं तो उस पर अर्थदंड लग सकता है। यानी सूचना देने में ही पीआईओ की बेहतरी है।

जावेद उस्मानी बुधवार को जीडीए सभागार में जन सूचना अधिकारी/प्रथम अपीलीय अधिकारी के चार दिवसीय मंडलीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है। सबसे पहले शासन स्तर पर तैनात जन सूचना अधिकारी, इसके बाद निदेशालय स्तर पर और अब मंडल स्तर पर जन सूचना अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
बताया कि पूरे प्रदेश में करीब 18000 जन सूचना अधिकारी हैं, इस प्रशिक्षण के जरिए सभी जन सूचना अधिकारियों को नियमों की जानकारी देकर यह कोशिश की जा रही है कि एकरूपता के साथ जन सूचना के आवेदनों का निस्तारण हो।

प्रशिक्षण के दौरान स्टेट रिसोर्स पर्सन राजेश मेहतानी ने जन सूचना के नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि अभी तक कोई भी समग्र नियमावली नहीं थी, दिसंबर 2015 में नियमावली बना दी गयी है, जिससे सूचना प्रकटन की प्रक्रिया और आसान हो गई है। उन्होंने सभी अधिकारियों को जन सूचना के नियमों, प्रकटन से छूट के साथ अन्य नियमों की भी जानकारी दी और शंकाओं का समाधान भी किया। इस मौके पर कमिश्नर अनिल कुमार, सीडीओ डॉ. मन्नान अख्तर, सभी अपर आयुक्त, वीसी जीडीए, अपर जिलाधिकारी समेत गोरखपुर के कई विभागाें जन सूचना अधिकारी मौजूद रहे।
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