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तो क्या निरीक्षण से पहले जेल प्रशासन को हो जाती है जानकारी

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गुरुवार की सुबह जिला जेल का औचक निरीक्षण कर बाहर आते सिटी‌ जिस्ट्रेट अजीत सिंह, सहायक पुलिस अधीक्
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... तो क्या निरीक्षण से पहले जेल प्रशासन को हो जाती है जानकारी
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सिटी मजिस्ट्रेट की अगुवाई में छापे के दौरान एक बार फिर कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला
गोरखपुर। एक तरफ प्रदेश के कई जिलों में जेल मेें असलहे, मोबाइल फोन, नशे की वस्तुएं लिए बंदियों की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं हैं। वहीं जिले के मंडलीय कारागार में पुलिस प्रशासन की ओर से होने वाली चेकिंग में कुछ नहीं मिलता। निकलते समय अधिकारी यही कहते हैं कि रूटीन चेकिंग थी। ऑल इज वेल। बृहस्पतिवार को भी कुछ इसी तरह की चेकिंग हुई। सुबह सात बजे ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी जेल पहुंचे और दो घंटे तक एक-एक बैरकों की तलाशी ली। लेकिन नतीजा वही पुराना। जबकि जेल से जमानत पर बाहर आए लोग कहते हैं कि मोबाइल और नशे की वस्तुएं बंदी धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं। इस पर सवाल यही उठता है कि क्या निरीक्षण से पहले जेल प्रशासन को इसकी जानकारी हो जाती है या छापे से पहले इसकी जानकारी लीक कर दी जाती है ।
बृहस्पतिवार को सिटी मजिस्ट्रेट अजीत प्रताप सिंह की अगुवाई में एएसपी व सीओ कैंट रोहन प्रमोद बोत्रे और सीओ क्राइम प्रवीण सिंह भारी फोर्स के साथ मंडलीय कारागार पहुंचे। पुलिस व प्रशासन के लोगों ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ रामधनी और जेलर प्रेमसागर शुक्ला के साथ महिला बैरक, कैंटीन, हाई सेक्योरिटी बैरक, मिलेनियम सहित एक-एक बैरक की तलाशी ली। दो घंटे तक चली इस कार्रवाई में पुलिस के हाथ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला।
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धड़ल्ले से मिलती है नशे की चीजें
सूत्रों और जमानत पर रिहा हुए कुछ बंदी बताते हैं की जेल में धड़ल्ले से नशे की वस्तुएं मिलती हैं। बंदी इनका इस्तेमाल भी करते हैं। बकायदा इनका रेट भी तय किया गया है। सुबह के समय और 11 बजे के आसपास इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है। एक गुटका, पान मसाला, खैनी जेल में बीस रुपये में मिलता है। सिगरेट एक डिब्बा सौ रुपये में मिलता है।
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अपराधी फोरजी, जैमर टूजी
सूत्र बताते हैं कि जेल में बंदी फोरजी नेटवर्क के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि मोबाइल फोन के इस्तेमाल को पकड़ने के लिए जेल में जो जैमर लगाए गए हैं वो टूजी नेटवर्क को ही ट्रैक करने में सक्षम है। इसके लिए जेल के अधिकारी, शासन को पत्र भी लिख चुके हैं। लेकिन अभी तक यहां फोरजी जैमर नहीं लगा। सूत्र बताते हैं कि कई हाई प्रोफाइल बंदी धड़ल्ले से जेल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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