प्रदेश सरकार की तरफ से जमीन ट्रांसफर करने के बाद एक बार फिर एम्स निर्माण की कवायद तेज हो गई है। सोमवार को प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के ज्वाइंट सेक्रेटरी सुनील शर्मा के नेतृत्व में एक तीन सदस्यीय टीम गोरखपुर पहुंची। टीम ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, लोक निर्माण विभाग और राजस्व प्रशासन के अफसराें के साथ गन्ना शोध संस्थान का निरीक्षण कर वहां मौजूद इमारतों का परीक्षण किया।
टीम यह जांचने आई थी कि वर्तमान में अस्थाई इस्तेमाल के लिए गन्न्ना शोध संस्थान की कौन सी इमारत काम आ सकती है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन एके सिंह ने बताया कि इस दौरान टीम को गन्ना भवन, गेस्ट हाउस, चार आवासीय भवन, गन्ना विकास परिषद के प्रशिक्षण केंद्र की इमारत, अस्थाई इस्तेमाल के लिए मुफीद लगी। मगर इन इमारतों के इस्तेमाल में एक बड़ी बाधा यह सामने आ रही है कि जहां ये बनी हैं वहीं पर एम्स की सबसे ऊंची इमारतें प्रस्तावित हैं। चूंकि गन्ना शोध संस्थान की जमीन, एयरपोर्ट से करीब है ऐसे में सुरक्षा के मद्देनजर एम्स की सबसे ऊंची इमारतों को एयरपोर्ट से सबसे दूर की तरफ प्रस्तावित किया गया है। ये चारों इमारतें भी वहीं स्थित हैं।
टीम करीब तीन घंटे निरीक्षण के बाद सुबह 11 बजे लखनऊ रवाना हो गई। इस मसले पर शाम को प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी के साथ बैठक करने के बाद टीम केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। बता दें कि महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो स्थित करीब 112 एकड़ गन्ना शोध संस्थान की जमीन पर एम्स का निर्माण तय होने के बाद 22 जुलाई 2016 को पीएम नरेंद्र मोदी ने फर्टिलाइजर कारखाना परिसर में हुई सभा के दौरान इसका शिलान्यास किया था। एचएससीसी इंडिया लिमिटेड को एम्स निर्माण का काम दिया गया है। मगर जमीन ट्रांसफर नहीं हो पाने की वजह से काम नहीं शुरू हो पा रहा था।