चुनाव आयोग के अधिकारी आरओ का साक्षात्कार लेत हुए।
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जीडीए सभागार में स्कूल-कालेजों की परीक्षा शुरू होने जैसा माहौल। कोई जल्दी-जल्दी आरओ हैंडबुक के पन्ने पलट रहा था तो कोई एक-दूसरे से बहस में मशगूल। परीक्षक के तौर पर निर्वाचन आयोग के अफसरों के पहुंचते ही सन्नाटा पसर गया। परिचय की औपचारिकता पूरी होने के बाद 10 जिलों के 63 आरओ पर एक-एक कर शुरू हुई पांच सौ सवालों की बौछार।
किसी के हिस्से आसान से सवाल आए तो किसी के कठिन। पर्ची पर सवाल पढ़ने के बाद कोई अटका तो पहले चुनाव करा चुके तमाम आरओ ने फर्राटा जवाब भी दिए। सुबह 10 बजे से शुरू हुआ सवाल-जवाब का यह सिलसिला शाम साढ़े पांच बजे तक चलता रहा। जब अफसर जीडीए सभागार से बाहर निकले तो उनके चेहरे पर वैसी ही तसल्ली के भाव थे जैसे आखिरी पेपर कीपरीक्षा देने के बाद कक्षा से बाहर निकलते विद्यार्थियों के।
दरअसल आयोग के निर्देश पर दो नवंबर से 10 नवंबर तक गोरखपुर यूनिवर्सिटी में 19 जिलों के 100 से अधिक रिटर्निंग अफसरों (आरओ) को विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया था। यह प्रशिक्षण कितना सफल रहा, इसे जांचने के लिए आयोग ने बुधवार को 10 जिलों के आरओ का साक्षात्कार आयोजित किया था।
आयोग ने परीक्षक के तौर पर डिप्टी सीईओ बिहार सोहन कुमार ठाकुर, कंसलटेंट एवं पूर्व सीईओ यूपी डॉ नूर मोहम्मद, काउंसलर एके मजूमदार तथा एडीएम फाइनेंस डॉ. चंद्रभूषण को जिम्मेदारी सौंपी थी। इस दौरान आरओ से मतदाता पुनरीक्षण अभियान से लेकर आदर्श आचार संहिता और काउंटिंग तक से संबंधित सवाल पूछे गए।