छह महीने में टूटी सांसद निधि की इंटरलॉकिंग सड़क
गोरखपुर। देवरिया बाईपास से सहारा इस्टेट के मुख्य द्वार तक छह महीने पहले सांसद निधि से बनी 100 मीटर की इंटरलॉकिंग सड़क खराब हो गई है। सीमेंट के ब्रिक्स टूटकर धंस गए हैं। ब्रिक्स की गुणवत्ता बेहद खराब बताई जा रही है। नगर निगम के इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण के रेट को देखें तो इस सड़क के निर्माण पर ज्यादा पैसा खर्च किया गया है।
सहारा इस्टेट के मुख्य द्वार से कुछ पहले ही सड़क खराब हो गई थी। इससे देवरिया रोड से घूमकर कॉलोनी में जाना कठिन हो रहा था। लोकसभा चुनाव के ऐलान से कुछ पहले मामला तत्कालीन सपा सांसद प्रवीण निषाद (अब संतकबीरनगर से भाजपा सांसद) के पास पहुंचा। प्रवीण ने इस्टीमेट बनाकर इंटरलॉकिंग सड़क के निर्माण का जिम्मा यूपी सिडको को सौंप दिया। महज 100 मीटर लंबी इंटरलॉकिंग सड़क का यह काम 9.24 लाख रुपये में कराया गया। 30 जनवरी 2019 को सहारा इस्टेट परिसर के भारत माता मंदिर के पास भव्य लोकार्पण समारोह हुआ। लोकार्पण समारोह में सपा के जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव और सचिव खरभान यादव भी मौजूद रहे।
लोकार्पण के कुछ दिन बाद ही इंटरलॉकिंग सड़क खराब होने लगी। सीमेंट के कई ब्रिक्स टूटकर धंस गए हैं। इससे सहारावासियों को दिक्कत हो रही है। उनका कहना है कि सड़क की गुणवत्ता इतनी खराब होगी, ऐसा सपने में भी नहीं सोचा था। सड़क निर्माण पर अच्छा बजट खर्च हुआ, लेकिन अच्छा नतीजा सामने नहीं आया। इस मामले में जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। मामले में सांसद प्रवीण निषाद से मोबाइल फोन पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन नहीं उठा। जब भी सांसद का पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
पत्थर पर सड़क की लंबाई का जिक्र नहीं
इंटरलॉकिंग सड़क के लोकार्पण का जो पत्थर लगा है, उसपर लंबाई का जिक्र नहीं है। नियमानुसार, सड़क की कुल लागत के साथ ही लंबाई का भी ब्योरा पत्थर पर होना चाहिए था।
कम खर्चे में बन सकती थी इंटरलॉकिंग सड़क
अगर नगर निगम की नियमावली के हिसाब से सहारा इस्टेट के मुख्य द्वार की इंटरलॉकिंग सड़क बनती, तो लागत कम आती। नगर निगम प्रशासन प्रति स्क्वायर मीटर इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण 946 रुपये में कराता है। इस हिसाब से 100 मीटर लंबी इंटरलॉकिंग सड़क के निर्माण पर 4.21 लाख 916 रुपये ही खर्च होते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दोगुना से ज्यादा रकम इस सड़क के निर्माण पर खर्च की गई है।