नगर निगम के 88 कामों में से 70 की जांच पूरी हो चुकी है और जांच टीम अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रही है। दूसरी ओर बाकी बचे 18 कामों की जांच जल्द पूरी करने के लिए संबंधित टीम को रिमाइंडर भेजने की तैयारी है। जांच में देरी को लेकर जांच टीमों से एक बार जवाब तलब हो चुका है। विश्वस्त सूत्राें के मुताबिक जांच में ज्यादातर कामों की गुणवत्ता खराब मिली है। इसे लेकर निगम के अफसरों और ठेकेदारों में काफी दिनों से हड़कंप भी है। पूर्व कमिश्नर पी. गुरुप्रसाद के पिछले महीने शैक्षणिक अवकाश पर चले जाने और यहां नए कमिश्नर के चार्ज लेते ही इन कामों से जुड़ अफसरों-ठेकेदारों के चेहरे खिल गए थे, मगर कमिश्नर अनिल कुमार के भी इस जांच को लेकर संजीदा दिखने पर संबंधित अफसरों-ठेकेदारों के चेहरे की खुशी गायब हो गई।
लगातार मिल रही शिकायतों पर पूर्व कमिश्नर पी. गुरुप्रसाद ने तीन साल के भीतर हुए सभी कामों की जांच के आदेश दिए थे। इसके लिए छह तकनीकी टीमें भी गठित की गई थी, मगर कामों की संख्या एक हजार से अधिक पाए जाने पर कमिश्नर ने हर वार्ड के 88 बड़े कामों की ही जांच करने का निर्देश दिया। आदेश के पखवारे भर बाद तक तो निगम ने जांच टीम को कामों से जुड़ी फाइलें ही नहीं मुहैया कराई। बाद में जब पूर्व कमिश्नर ने सख्ती की तो निगम ने किसी तरह जांच टीम को फाइलें दीं। जिन कामों की जांच हो रही है उनमें सड़क और नालों के निर्माण की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि जांच अब तक पूरी भी हो गई होती मगर तकनीकी टीम को लीड कर रहे एक अफसर का तबादला होने के बाद उनके हिस्से के कामों की जांच प्रभावित हो गई। नए अफसर की तैनाती के बाद टीम ने अब फिर जांच तेज की है। इस टीम के जिम्मे करीब 18 काम हैं। उधर, इस जांच की मानीटरिंग कर रहे उप निदेशक अर्थ एवं संख्या अधिकारी ए. अंसारी की तरफ से इस टीम को गुरुवार को रिमाइंडर भी देने की तैयारी है।