डीएम को ज्ञापन देने पहुंचे भारतीय चिकित्सा संघ के लोग।
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क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट के खिलाफ शनिवार को प्राइवेट डॉक्टरों ने विरोध रैली निकाली। प्राइवेट डॉक्टर अपने क्लीनिक, अस्पताल जाने के बजाय सुबह सीतापुर आई हास्पिटल में एकत्र हुए। तीन घंटे तक यहां एक्ट के खिलाफ विचार विमर्श के बाद डॉक्टर जुलूस की शक्ल में डीएम दफ्तर पहुंचे। यहां प्रदर्शन करने के बाद डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा और एक्ट को वापस लेने की मांग की।
केन्द्र सरकार ने वर्ष 2010 में क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट को पास किया। उसी समय से प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर इस कानून का विरोध कर रहे हैं। कुछ दिन पहले राज्य सरकार ने इस कानून को लागू कर दिया। राज्य सरकार के इस फैसले के विरोध में शनिवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन गोरखपुर शाखा के बैनर तले डॉक्टर सीतापुर आई हास्पिटल में एकत्र हुए। आईएमए गोरखपुर शाखा के बैनर तले डॉक्टरों का जुलूस निकला जो डीएम दफ्तर पर पहुंचकर खत्म हुआ। आईएमए गोरखपुर शाखा के महासचिव डॉ. विरेन्द्र गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार ने पश्चिमी देशों के कानून को भारत के डॉक्टरों पर थोपने का प्रयास किया है। इस कानून के लागू होने से मरीजों का इलाज कई गुना मंहगा हो जाएगा। इससे लालफीताशाही को भी बढ़ावा मिलेगा।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह व नीप के चीफ कैंपेनर डॉ. आरएन सिंह ने कहा कि देश में पहले से ही आठ लाख डॉक्टरों और 20 लाख पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। नए कानून से छोटे अस्पताल, एकल चिकित्सक क्लीनिक और पैथोलॉजी सेंटरों में ताला लग जाएगा। डॉ. वाईडी सिंह, डॉ. एसएस शाही, डॉ. वीएम भाटिया, डॉ. वीएन अग्रवाल, डॉ. यशवीर सिंह, डॉ. अमित गोयल, डॉ. सौरभ कुमार, डॉ. देवेंद्र भागवानी आदि मौजूद थे।