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मांगा शाकाहारी खाना, दाल-सब्जी से निकली हड्डी, भड़के परिवार ने किया हंगामा

Sat, 23 Nov 2019 04:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
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खाने का सैंपल लेते हुए खाद्य विभाग अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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रामगढ़ताल इलाके के इंदिरा नगर स्थित होटल फाइव सेंस में शुक्रवार को ग्वालियर से आए एक परिवार ने शाकाहारी खाना मंगाया, जब वे खाना खाने लगे तो दाल और सब्जी से हड्डियां निकलने लगीं।

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यह आरोप लगाते हुए भड़के परिवार ने जमकर हंगामा किया। डीएम से शिकायत की गई। जिसके बाद होटल पहुंची खाद्य विभाग की टीम ने परोसी गई खाद्य सामग्री के नमूने भर कर जांच के लिए भेजा। रिपोर्ट आने पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। रिपोर्ट आने में दस दिन लगेंगे।

जानकारी के मुताबिक इंदिरा नगर निवासी डॉ. आनंद प्रताप सिंह के यहां शादी में शामिल होने के लिए ग्वालियर से कुछ लोग आए हैं, जो होटल फाइव सेंस में ठहरे थे। शुक्रवार की दोपहर करीब तीन बजे ग्वालियर के डॉ. अशोक पाल सिंह एवं देवेंद्र प्रताप सिंह परिवार के साथ खाने को होटल के रेस्टोरेंट में पहुंचे और उन्होंने दाल मक्खनी, जीरा राइस, मिक्स वेज और बटर नान मंगाया।
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जब उन्होंने खाना शुरू किया तो दाल और सब्जी में से हड्डियां निकलने लगीं। खाने में हड्डियां देख दोनों परिवार के सदस्यों को उल्टी होने लगी। घटना की जानकारी होने पर डॉ. आनंद वहां पहुंच गए और इसकी सूचना पुलिस को दे दी।

मौके पर पुलिस ने पहुंच पूरी घटना की जानकारी ली। इस दौरान खाद्य विभाग की भी टीम मौके पर पहुंच गई और खाने का सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया। फिलहाल इस मामले में पीड़ित परिवार की ओर से कोई तहरीर नही दी गई है।

शाकाहारी और मांसाहारी बर्तन अलग करने की नोटिस
मामला डीएम तक पहुंचने की वजह से हरकत में आई खाद्य विभाग की टीम ने होटल को नोटिस जारी करके शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के बर्तन अलग रखने को कहा है। इसके साथ ही बर्तन के रंग भी अलग करना होगा, ताकि कहीं से किसी को गलती से भी शाकाहारी की जगह मांसाहार ना परोसा जाए।

होटल से शिकायत आने पर खाने का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी। होटल को नोटिस जारी कर शाकाहारी व मांसाहारी बर्तन अलग-अलग रंग के रखने का भी आदेश दिया गया है।
अनिल सिंह, अभिहीत अधिकारी, खाद्य विभाग

यह है कार्रवाई का नियम
यदि कोई खाद्य पदार्थ मानव जीवन के लिए हानिकारक होता है तो ऐसे मामले जांच में पुष्टि होने के बाद सिविल कोर्ट में खाद्य विभाग की ओर से केस दर्ज कराया जाता है। इसमें जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान होता है

यदि कोई खाद्य पदार्थ मानव जीवन के लिए हानिकारक नहीं होता है मगर उसकी गुणवत्ता जांच में ठीक नहीं पाई जाती है तो एडीएम सिटी कोर्ट में खाद्य विभाग केस दर्ज कराता है और पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान होता है।

उनका ऐसा आरोप था कि शाकाहारी की जगह मांसाहारी भोजन दिया गया है। होटल में कैमरा लगा हुआ है जिसमें पूरी रिकॉर्डिंग है, उसे देखा जा सकता है। आरोप निराधार है।
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दीपक, जीएम, होटल फाइव सेंस

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