पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह इस बार भी जिले के 50 से अधिक बूथों पर ईवीएम और वीवीपैट दगा दे गए। कहीं ईवीएम के कंट्रोल यूनिट ने काम करना बंद कर दिया तो कहीं बैलेट यूनिट ने। इससे न्यूनतम 20 मिनट से लेकर दो घंटे तक मतदान प्रभावित रहा। ज्यादातर ईवीएम शुरूआती दो घंटे में ही जवाब दे गईं। वहीं कुछ बूथों पर मॉकपोल होने के बाद ईवीएम खराब हो गए।
कंट्रोल रूम में आई शिकायतों के मुताबिक करीब 15-15 कंट्रोल और बैलेट यूनिट जबकि 22 वीवीपैट खराब हुए। बड़हलगंज के टाड़ा गांव के बूथ संख्या 345 पर ईवीएम खराब होने से 45 मिनट तक मतदान प्रभावित हुआ तो वहीं बूथ संख्या 351 प्राथमिक विद्यालय बढ़या टिकुर में ईवीएम खराब होने से सुबह 8.11 बजे तक मतदान ही नहीं शुरू हो सका।
इसी तरह सहजनवां के डोहरिया कला में मॉक पोल होने के बाद ईवीएम जवाब दे गया। कंट्रोल रूम और सेक्टर-जोनल मजिस्ट्रेट तक सूचना पहुंचने के घंटे भर बाद भी वहां ईवीएम नहीं बदली जा सकी। वहां सुबह 8.40 के बाद वोटिंग शुरू हो सकी। शहर क्षेत्र के इस्लामियां गर्ल्स इंटर कॉलेज के भाग संख्या 257 के कमरा नंबर चार में 7.35 पर ईवीएम बदला जा सका।
कैंपियरगंज के दो बूथों पर पांच घंटे तक वोटिंग का बहिष्कार
क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने से नाराज दो बूथों के मतदाता अपनी आवाज इंतजामिया तक पहुंचाने के लिए पांच घंटे तक घरों से ही नहीं निकले। खामोशी से विरोध की यह आवाज घंटे भर के भीतर ही जिला प्रशासन से लेकर निर्वाचन आयोग तक पहुंच गई। इसके बाद ऐसी खलबली मची की अफसर मतदाताओं को मनाने दौड़ पड़े। काफी मशक्कत के बाद करीब पांच घंटे बाद मतदाता वोट देने के लिए तैयार हुए।
मामला कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र का है। नयनसर गांव के बूथ संख्या 314 पर मॉक पोल होने के बाद कोई वोट देने ही नहीं पहुंचा। वहां गांव के पास रेलवे क्रासिंग का फाटक बंद होने से लोग नाराज थे। उनका कहना था कि क्रासिंग बंद होने से उन्हें मुख्य मार्ग तक पहुंचने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। सीडीओ, एसडीएम समेत कई आला अफसरों की चिरौरी के बाद वहां 12 बजे के करीब मतदान शुरू हो सका। इसी तरह रास्ते को ही लेकर कैं पियरगंज के ही चकदहां में भी रास्ता नहीं होने से नाराज मतदाताओं ने करीब तीन घंटे तक मतदान का बहिष्कार किया।