जब दिल की बात आती है तो हाथ अपने आप ही उठकर छाती के बाईं ओर चला जाता है। आपने किताबों में भी पढ़ा होगा कि मानव शरीर में दिल की जगह बाईं ओर होती है, लेकिन गोरखपुर के जमालुद्दीन के साथ ऐसा नहीं है। जीवन के 43 साल बीत जाने के बाद जमालुद्दीन को पता चला कि उसके शरीर के अंदर अंगों का बड़ा गड़बड़झाला है। उसका दिल बाएं की जगह दाईं ओर धड़कता है और अन्य अंग भी उलट पुलट गए हैं।
दरअसल, पिछले दिनों जमालुद्दीन को पेट में दर्द हुआ, जिसकी शिकायत लेकर वह एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए। पडरौना के रहने वाले जमालुद्दीन की जब जांच की गई तो डॉक्टर भी हैरत में पड़ गए। जमालुद्दीन के पेट दर्द का इलाज कर रहे डॉ. संदीप अरुन ने जांच कराई, जिसमें पता चला कि उनकी पित्त की थैली में पथरी है, लेकिन समस्या यह है कि पित्त की थैली दाईं ओर न होकर बांयी ओर है।
टिमोनियर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में बैरियाट्रिक लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. शशिकांत दीक्षित ने उनकी सर्जरी करने का निर्णय लिया लेकिन अंग विपरीत दिशा में होने के कारण सर्जरी में काफी समस्या आई। उन्होंने थ्री डी लैप्रोस्कोपिक मशीन पर तीन दिन अभ्यास किया। फिर 30 सितंबर को जमालुद्दीन का सफल ऑपरेशन किया। मरीज 24 घंटे में स्वस्थ होकर घर चला गया।
टिमोनियर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर संचालक डॉ. शशिकांत दीक्षित ने बताया कि इसे साइटस इनर्वस टोटलिस कहते हैं। इसका वर्णन पहली बार वर्ष 1643 में मार्का आरेलियो ने किया था। गुणसूत्रों में खराबी के कारण दस हजार लोगों में कोई एक व्यक्ति ऐसा होता है, जिसमें यह पाया जाता है। ऐसे व्यक्ति के मुख्य आंतरिक अंग जैसे हृदय, लीवर, तिल्ली, पित्त की थैली आदि विपरीत स्थिति में होते हैं। अमेरीका के महान गायक, एक्टर और हीरो डोनी आस्मंड भी ऐसे ही व्यक्ति थे। ऐसे व्यक्तियों में हृदय रोग की संभावना ज्यादा होती है।