नार्मल स्थित हजरत बाबा मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां के सालाना उर्स के दूसरे दिन मंगलवार को अकीदतमंदों ने बाबा को चादर पेश की और चादर व गागर का जुलूस निकाला। रात में कव्वाली हुई जिसमें कलाकारों ने धर्म, मजहब पर वार करते हुए इंसानियत का संदेश दिया।
दरगाह पर सबसे पहले फज्र की नमाज के बाद कुरानखानी हुई। मगरिब की नमाज के वक्त तुर्कमानपुर से सरकारी चादर व गागर का जुलूस निकला जो तुर्कमानुपर, हाल्सीगंज, मिर्जापुर, साहबगंज, खूनीपुर, नखास चौक, रेती चौक, घंटाघर, पांडेयहाता, नार्मल स्कूल होते हुए बाबा के आस्ताने पर पहुंचा, जहां पर अकीदतमंदों ने बाबा को चादर पेश की। घोड़ा, बघ्घी, बैंड बाजे व शहनाई की धुन पर बढ़ रहा जुलूस कई चैराहों पर स्थानीय लोगों ने स्वागत किया।
इस दौरान दरगाह के अध्यक्ष इकरार अहमद, सैयद मोहतसिम कबीर, मौलाना मकसूद आलम, सैयद शहाब, मोहम्मद अली, शमसीर अहमद शेरू, तौकीर किक्कू वहाज, अहमद हसन, सैयद सदफ, रमजान आदि शामिल हुए।
कव्वाली का हुआ जबरदस्त मुकाबला
देर रात तक चली कव्वाली के दौरान कव्वालों में जमकर मुकाबला हुआ। दिल्ली से आए आमिल आरिफ साबरी व उनके साथियों ने ‘हिंदू ही बुरा है ना मुसलमान बुरा है, आ जाए बुराई पे तो इंसान बुरा है’ कव्वाली पेश कर खूब वाहवाही बटोरी। इसके बाद बदायूं के कव्वाल जुनेद सुल्तानी ने ‘ऐसा तो कोई हीरा खजाने में नहीं है, जैसा है मेरा पीर जमाने में नहीं है’ पेशकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
आज के कार्यक्रम
सुबह 10 बजे : कुल शरीफ
दोपहर 1.30 बजे प्रसाद वितरण
रात 10 बजे : कव्वाली का मुकाबला