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48 घंटे में 180 मिलीमीटर बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त

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विजय चौराहे से आर्यनगर रोड पर बारिश के बाद हुआ जल जमाव।
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48 घंटे में 180 मिलीमीटर बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
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गोरखपुर। दो दिनों से लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। शुक्रवार को तो दुकानों से लेकर दफ्तर तक में सन्नाटा पसरा रहा। ज्यादातर स्कूल बंद रहे और बच्चे घरों में ही कैद रहे। मौसम विभाग ने बीते 48 घंटे में करीब 180 मिमी बारिश दर्ज की। गुरुवार शाम पांच बजे से शुक्रवार की शाम पांच बजे तक सर्वाधिक 119 मिलीमीटर बारिश हुई। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 28 और 29 सितंबर को भी गोरखपुर एवं उसके आसपास मध्यम से भारी बारिश के आसार हैं, जबकि एक अक्तूबर तक रुक-रुककर बारिश होती रहेगी।
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय के मुताबिक चक्रवाती हवा का क्षेत्र, दक्षिण महराष्ट्र पर ऊपरी हवा में 25 हजार फीट तक बना हुआ है। एक टफ लाइन दक्षिण महाराष्ट्र और सटे गोवा, कर्नाटक से निकलकर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दक्षिण पूर्व उप्र होते हुए बिहार तक जा रही है। एक अन्य चक्रवाती हवा का क्षेत्र पूर्व असम पर ऊपरी हवा में सात हजार फीट तक बना हुआ है तथा एक पश्चिमी विक्षोभ, जम्मू-कश्मीर पर ऊपरी हवा में चक्रवाती हवा के क्षेत्र के रूप में स्थित है। इनके चलते गोरखपुर क्षेत्र में एक कुछ जगहों पर भारी वर्षा तो 75 फीसदी जगहों पर मध्यम वर्षा के आसार हैं।
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महेवा मंडी में घुटने तक पानी में लगीं दुकानें
गोरखपुर। दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश का असर शुक्रवार पूर्वांचल की सबसे बड़ी महेवा मंडी में देखने को मिला। पूरी मंडी जलमग्न नजर आई। जलभराव के बीच व्यापारियों ने दुकानें लगाईं। लोग घुटने भर पानी में खरीदारी करते रहे। पूर्वांचल सब्जी फल थोक विक्रेता कल्याण समिति के अध्यक्ष संजय शुक्ला ने बताया कि महेवा मंडी के सुंदरीकरण के नाम पर दो करोड़ से अधिक रुपये खर्च हो चुके हैं। मंडी प्रशासन के अधिकारियों से जल निकासी और मंडी के विस्तार की मांग अनेक बार की गई लेकिन इस दिशा में अबतक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया जा सका। व्यापारी करोड़ों रुपये टैक्स देने के बावजूद गल्ला मंडी में व्यापार करने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले नगर निगम ने नाला निर्माण के लिए खुदाई कर दी। ठेकेदार ने 20 सितंबर के पहले काम पूरा होने की बात कही थी, लेकिन अबतक निर्माण नहीं हो सका। इससे व्यापारियों का काफी नुकसान हो रहा है।
तारामंडल रोड से सटे इलाकों में जल कर्फ्यू
बारिश से सर्वाधिक दिक्कत तारामंडल क्षेत्र के लोगों को हुई। रोड के दोनों तरफ बसी डेढ़ दर्जन से अधिक कॉलोनियों में 48 घंटे से डेढ़ से ढाई फीट तक पानी लगने से लोग घरों में कैद दिखे। सर्विस लेन तक पर चलना मुश्किल हो गया। बुद्ध नगर, आजाद नगर पूर्वी, सिद्धार्थ नगर, बुद्ध विहार, सिद्धार्थपुरम समेत कई कॉलोनियों में साइलेंसर में पानी चले जाने से 20 से अधिक गाड़ियां खराब हो गईं।
संपवेल सिस्टम और नालों की सफाई से मिली राहत
लगातार हो रही बारिश से जलभराव की समस्या तो कई इलाकों में घंटों तक बनी रही, मगर कुछ इलाकों से पानी जल्दी निकल गया। नगर निगम द्वारा दो संपवेल बनाए जाने से लालडिग्गी, साहबगंज, माया रोड सहित पुराने गोरखपुर के इलाकों में कुछ ही देर में पानी निकल गया। इसी तरह नालों की सफाई से भी बक्शीपुर, टाउनहॉल, सिविल लाइन, आरटीओ से सिटी मॉल तक स्कूल लेन से भी जल्दी पानी निकल गया।
नारायणपुरम में पानी निकासी के लिए नाली ही नहीं
गोरखपुर। पादरी बाजार के नारायणपुरम इलाके में जलभराव से लोग खासे परेशान रहे। लोगों ने बताया कि पानी निकासी के लिए नालियां नहीं बनाई गई हैं। इस कारण जरा सी बरसात में भी पानी भर जाता है। ज्यादा बारिश हो तो पानी घर में घुस जाता है। यहां रहने वाले नीलू राय ने बताया कि कई साल हो गए कहते-कहते लेकिन नाली का निर्माण नहीं कराया गया। पार्षद से भी कई बार शिकायत की गई पर कोई हल नहीं निकला। धन्नजय पाठक ने कहा कि ज्यादा बारिश होने पर कॉलोनी में सड़क दिखाई नहीं पड़ती। घुटने से ऊपर तक पानी भर जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।
सात साल का टूटा रिकार्ड, जारी हुआ अलर्ट
गोरखपुर। गुरुवार से शुक्रवार तक हुई बारिश ने सात सालों में सितंबर महीने में हुई सबसे ज्यादा बारिश का रिकार्ड तोड़ दिया। इसके पहले 18 सितंबर 2012 को 155.7 मिमी बारिश हुई थी। मौसम विभाग की तरफ से जारी चेतावनी के मुताबिक शनिवार और रविवार को मध्यम से भारी बारिश के आसार हैं। राहत आयुक्त जीएस प्रियदर्शी की तरफ से गोरखपुर, देवरिया, संतकबीरनगर समेत 18 जिलों में अलर्ट जारी करते हुए वहां के डीएम को बचाव कार्य की तैयारियां पूरी रखने को कहा गया है।
सितंबर माह में हुई बारिश
03 सितंबर 13- 57.6 मिमी
04 सितंबर 18- 24.2 मिमी
14 सितंबर 15- 11.6 मिमी
18 सितंबर 12- 155.7 मिमी
20 सितंबर 14- 50.2 मिमी
22 सितंबर 17- 57.3 मिमी
28 सितंबर 16- 79.4 मिमी
27 सितंबर 19- 119.1 मिमी
बारिश से घाघरा नदी लाल निशान के पार, राप्ती भी बढ़त पर
बड़ी गंडक खतरे के नीचे पर लगातार कर रही कटान
गोरखपुर। लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। घाघरा नदी लाल निशान पार कर गई है, जबकि राप्ती में भी तेज बढ़ाव दर्ज किया गया। गंडक नदी कुशीनगर में खतरे के निशान से नीचे है पर वहां लगातार कटान हो रही है, जबकि सिंचाई विभाग ने फ्लड फाइटिंग के नाम पर करोड़ों खर्च कर दिए हैं।
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पूर्वांचल में कई दिनों से बरसात हो रही है। नेपाल की पहाड़ियों पर भी पानी बरस रहा है। इसी वजह से नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सबसे अधिक असर घाघरा नदी पर पड़ा है। घाघरा बरहज में शुक्रवार की सुबह 66.700 मीटर पर बह रही थी, जबकि खतरे का निशान 66.500 मीटर है। राप्ती नदी का जलस्तर चार दिन पहले नीचे चला गया था, लेकिन इधर की बारिश से उसका जलस्तर 72.920 पर पहुंच गया है। हालांकि राप्ती अभी खतरे के निशान से एक मीटर से अधिक नीचे है। जिले में बहने वाली रोहिन नदी खतरे के निशान से करीब तीन मीटर नीचे बह रही है। सबसे आश्चर्यजनक स्थिति गंडक नदी की है। यह नदी कुशीनगर के बाल्मीकि नगर बैराज पर लगभग तीन मीटर, खंडा में एक मीटर, व अमवा खास पर 3.5 मीटर नीचे बह रही है पर यह कई स्थान पर लगातार कटान कर रही है।
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