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भक्तों के बीच गुरु की भूमिका में नजर आए पीठाधीश्वर

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गोरखनांथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा पर बाबा गोरखनांथ का पूजा करते गोरक्षपीठाधीश्वर मंहत योगी आदि
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गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर में गुरुपूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम में भक्तों के बीच पहुंचे गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ गुरु की भूमिका में नजर आए। उन्होंने कहा कि गुरुपूर्णिमा गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का पर्व है। गुरु समाज का मार्गदर्शन करते हुए समाज को नई दिशा देता है। ऋषियों-मुनियों ने अपने उदार चरित्र से गुरु-शिष्य परंपरा को नई ऊंचाइयां दीं हैं। अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को याद करते हुए कहा कि उनके द्वारा प्रशस्त मार्ग पर चलकर गोरक्ष पीठ गौ सेवा, शिक्षण संस्थाओं, चिकित्सालयों और वनवासी सेवाश्रम के माध्यम से निरंतर लोक कल्याण के कार्य में जुटा हुआ है।
इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ 12.30 बजे मंदिर पहुंचे। सबसे पहले गुरु गोरखनाथ की पूजा की। उसके बाद नाथ पंथ के सभी योगियों की समाधि पर शीश नवाया। आखिर में अपने गुरुदेव की पूजा की। पूजा के दौरान योगी ने पीठ के देश व समाज के उत्थान के लिए कार्य करते रहने और लोगों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देते रहने का आशीर्वाद मांगा। हालांकि गोरक्ष पीठाधीश्वर गुरुपूर्णिमा पर होने वाली सुबह की पूजा में शामिल नहीं हो पाए। यह पूजा मुख्य पुजारी कमलनाथ ने संपन्न कराई। पूजा के बाद योगी स्मृति सभागार में पहुंचे और वहां बड़ी संख्या में उपस्थित मंदिर से जुड़े भक्तों और नाथ योगियों से मिले। योगी के विलंब से पहुंचने के चलते भक्तों को तिलक लगाकर आशीर्वाद देने का कार्यक्रम नहीं हो सका।
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भजनों में किया नाथ योगियों की महिमा का गुणगान
कार्यक्रम के दौरान लोक गायक राकेश श्रीवास्तव ने मंदिर परिसर में भजनों के माध्यम से गुरु-शिष्य की भक्ति तथा नाथ योगी की महिमा का गुणगान किया। इस दौरान विधायक राघवेंद्र सिंह, राकेश बघेल, शीतल पांडेय, श्यामधनी राही, उपेंद्र दत्त शुक्ल, सरोज रंजन शुक्ला, अश्वनी त्रिपाठी, डॉ. राकेश राय, डॉ. धर्मेद्र सिंह, राहुल श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।
लोक कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है धर्म
गोरक्ष पीठाधीश्वर ने कहा कि दुख का सबसे बड़ा कारण मैं और मेरा है। जब व्यक्ति सिर्फ अपने बारे में सोचता है तो समाज पतन की ओर बढ़ता है। सबके भले के लिए सोचता है तो उसे सफलता मिलती है और समाज का भी भला होता है। कहा कि धर्म सिर्फ उपासना या पूजा पद्धति नहीं है, बल्कि यह एक माध्यम है जो हमें लोक कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। हर देशवासी को अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करते हुए समाज के बेहतरी के लिए कार्य करना चाहिए।
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ऋषि परंपरा की प्रसाद है योग
योगी ने कहा कि योग भारत की ऋषि परंपरा का प्रसाद है। उसको वैश्विक पटल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहचान दिलाई। चीन व इस्लामिक देशों में भी योग को भव्य तरीके से मनाया गया। कुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि कुंभ का मतलब पहले अराजकता और गंदगी होती थी। इस साल कुंभ में 127 देशों के लोगों ने हिस्सा लिया। 72 देशों के राजदूत स्नान करने पहुंचे।
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