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मुख्य आरोपी गन हाउस संचालक अब भी पुलिस की पकड़ से दूर

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मुख्य आरोपी गन हाउस संचालक अब भी पुलिस की पकड़ से दूर
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गोरखपुर। असलहा लाइसेंस में फर्जीवाड़े का मामला बाहर आने के बाद कई लोगों डरे हुए हैं। लाइसेंसी असलहे की चाहत में जालसाजी का शिकार होने वालों में ठेकेदार, जमीन के कारोबारी और दुकानदार ही नहीं चुनाव लड़ चुके नेता भी शामिल हैं। प्रशासन की टीम जहां लाइसेंसों की पड़ताल में जुटी है वहीं पुलिस फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड और गन हाउस संचालक की तलाश कर रही है। लेकिन दोनों ही टीमों को अभी खास सफलता नहीं मिली है। रवि गन हाउस के सभी दस्तावेजों को पुलिस ने जब्त कर लिया है।
फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाकर असलहा खरीदने का मामला उजागर होने के बाद जिलाधिकारी ने जनपद के गन हाउसों के दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच के आदेश दिए थे। एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की टीम ने दो दिनों तक छापेमारी कर जनपद की सभी लाइसेंसी दुकानों की जांच कर बिक्री, स्टाक रजिस्टर को कब्जे में ले लिया था। इस मामले में सर्वाधिक संदिग्ध भूमिका वाले रवि गन हाउस को भी सील कर दिया गया था। इधर, फर्जी शस्त्र लाइसेंसों की पहचान के लिए असलहा विभाग के रिकार्ड से जब्त दस्तावेजों का मिलान कराया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि जब्त किए दस्तावेजों में फर्जीवाड़े से जुड़ी कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है। इन दुकानों के रिकार्ड बहुत हद तक ठीक हैं। कुछ कमियां जो मिली भी हैं वह रिकार्ड के संग्रह व उसके रखरखाव से जुड़ी बताई जा रही हैं। हालांकि इसको लेकर अभी कोई भी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है।
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उधरए फर्जी लाइसेंसों की पड़ताल शुरू होने के बाद विभाग से लेकर बाहर तक चर्चाओं का बाजार गर्म है। बताया जा रहा है कि लाइसेंस बनवाने वालों में लोकसभा और विधानसभा का चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी भी शामिल हैं। इन्होंने अपने साथ चलने वाले लोगों का असलहा बनवाया है तो कुछ पुराने प्रतिष्ठित परिवार के लोग भी शौक पूरा करने के लिए फर्जीवाड़े का शिकार हो गए हैं।
थानों से भी कराया जाएगा मिलान
ऐसे लाइसेंसों का मिलान थाने से भी कराया जाएगा जिनकी अवधि काफी पुरानी है और हाल-फिलहाल में या तो उनका नवीनीकरण कराया गया है या फिर उसे ऑनलाइन कराया गया है। इसके लिए सभी थानों पर असलहों का रिकार्ड दुरुस्त करने को कहा गया है। वहीं पूरी जांच में रवि गन हाउस के परिचितों के साथ ही खजनी के भी कुछ लोग चिन्हित हुए हैं, जो इस फर्जीवाड़े में शामिल हैं। पुलिस को भरोसा है कि कई लोग इस मामले में फंसेंगे। वहीं शस्त्र के दुकानों के गोलियों, कितने असलहे बिके इन सब का भी मिलान कराया जा रहा है। वहीं पुलिस का मानना है कि कई सरकारी कर्मचारी भी इस मामले में फंसेंगे। जांच टीम उनकी भी भूमिका की जांच कर रही है।
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यह है मामला
शिकायत के बाद तीन लोगों के नाम सामने आए थे जिन्होंने फर्जी लाइसेंस हासिल कर उसपर असलहे खरीदे हैं। कैंट पुलिस ने इस प्रकरण में असलहा बाबू प्रथम राम सिंह की तहरीर पर रवि आर्म्स के मालिक, शिवम मिश्रा, विकास तिवारी और तनवीर खान के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमेें से तनवीर को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेजा है और अन्य आरोपी अभी फरार है।
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