वर्तमान समय में चल रही गुड्स एवं सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) रिटर्न फाइल करने की प्रणाली एक अप्रैल 2020 से पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। एक अप्रैल 2020 से सेंट्रल जीएसटी रिटर्न प्रणाली पूरी तरह से बदल जाएगी। एक जनवरी 2020 से इसे ट्रायल के तौर पर शुरू किया जा रहा है।
शनिवार को छात्रसंघ चौराहे पर स्थित केंद्रीय जीएसटी कार्यालय पर आयोजित सेमिनार में डिप्टी कमिश्नर सेंट्रल जीएसटी डॉ. बीएन संदीप ने कहा कि जीएसटी प्रणाली को सरलीकरण के लिए सरकार ने कई बदलाव किया है। फिलहाल तो यह स्वैक्षिक है, लेकिन नए वित्तीय वर्ष से यह अनिवार्य हो जाएगा। पहले टैक्स रिटर्न के लिए डेढ़ करोड़ से नीचे और डेढ़ करोड़ के ऊपर के होते थे, लेकिन अब स्लैब को पांच करोड़ के नीचे और पांच करोड़ रुपये के ऊपर का तय कर दिया गया है।
पांच करोड़ रुपये से ज्यादा आय वालों को आरईटी-1 हरेक महीने फाइल करना है। वहीं पांच करोड़ रुपये से कम आय वालों को आरईटी-2 और आरईटी-3 फाइल करना होगा। जीएसटी इंस्पेक्टर चंद्रशेखर आजाद ने नए टैक्स रिटर्न फाइल करने संबंधी जानकारी दी। इस दौरान विभाग के अधिकारियों के अलावा शहर के विभिन्न चार्टर्ड अकाउंटेंट, चैंबर ऑफ कॉमर्स और चैंबर आफ ट्रेडर्स के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
:: एक नया सवेरा योजना का लाभ उठाने की अपील
इस दौरान विभाग के अधिकारियों ने केंद्र सरकार की ओर से जारी किए सबका विश्वास- विरासत विवाद समाधान के अंतर्गत जीएसटी के लागू होने से पहले सेंट्रल एक्साइज एवं सर्विस टैक्स के बकाया, विवादों आदि के निपटारे के लिए सरकार ने इस योजना को लागू किया है। इसके तहत कुछ शर्तों के साथ पेनाल्टी, ब्याज की पूरी छूट लेकर साथ साथ विवादित या बकाये कर में भी 70 प्रतिशत तक कि छूट दी जा रही है। यह योजना 31 दिसंबर तक जारी है।