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बाढ़ का पानी पीकर बचा रहे जिंदगी

Mon, 21 Aug 2017 02:03 AM IST
राजन राय, अमर उजाला, गोरखपुर।
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बाढ़ के पानी में घिरे लोग। - फोटो : Amar Ujala
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मानीराम से कोई सात किलोमीटर दूर ताल जहदा के करीब बसे गांव रामपुर-गोपालपुर (गोनरपुरा) में भूखे-प्यासे लोग अब जिंदगी बचाने के लिए बाढ़ का पानी उबाल कर पीने लगे हैं। राशन खत्म हो चुका है, खाने को कुछ नहीं बचा है। जो बीमार हैं दवाओं के अभाव में कराह रहे हैं, छोटे-छोटे बच्चे बिलबिला रहे हैं। ये हालात तब हैं जबकि शासन-प्रशासन हर गांव तक राहत सामग्री पहुंचाने का दावा कर रहा है।
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बाढ़ राहत सामग्री बांटने जा रहे पीएसी के जवानों के साथ अमर उजाला की टीम ने इस गांव के वीभत्स हालात को करीब से देखा। 15 फीट गहरे पानी में तेज लहरों के बीच जब बोट गांव की सरहद में घुसी तो लोग छतों से हाथ दिखाकर बुलाने लगे। हरिजन बस्ती और यादव टोला में लोगों के घरों में तीन से चार फीट पानी घुसा था। हरिजन बस्ती से सटे दिनेश सिंह के घर के पास बोट को नीरज ने जैसे ही रोका, पास के घरों के बहुत सारे लोग पानी में कूद पड़े। बच्चे, बूढ़े और महिलाओं में राहत सामग्री लेने के लिए आपस में ही छीनाझपटी होने लगी। यह दृश्य किसी की भी संवेदनाओं को झकझोर देने वाला था। छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में जैसे ही बिस्किट के पैकेट गए, तत्काल फाड़ कर खाने लगे।

एक व्यक्ति ने बीच लहरों से जान जोखिम में डालकर पहुंचने की कोशिश की तो पीएसी के जवान सरोज प्रेमी और कमल सिंह ने उसे घर पहुंचने का भरोसा देकर लौटा दिया। छत पर मदद की आस में खड़ी गांव की गीता और सीता बेहद गुस्से में थी। बोलीं, जब मर गए होते तब आते आप लोग। दो दिन हो गए हम लोग बाढ़ का पानी उबाल कर पी रहे हैं। घर में रखा भूजा, चना सब खत्म हो गया है। आटा, चावल, दाल तो है पर पकाएं कैसे, रसोई गैस भी को भी इसी बीच खत्म होना था। अपनी छत पर बैठे हंसराज की आंखें चूड़ा-भेली का पैकेट और पानी पाकर चमक उठी। भावुक होकर बोले, हमने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी कि कोई आएगा। शुक्रवार को हेलीकाप्टर घूमा तो लंगोटी उठाकर दिखाया लेकिन ऊपर से ही गुजर गया। 
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छत पर ही शौच को मजबूर हैं महिलाएं
हरिजन और यादव टोला में कुल 65 घर हैं और अभी भी 250 लोग बाढ़ में फंसे हैं। यहां के लोगों के सामने पेयजल और शौच दो बड़ी चुनौती है। गंदा पानी को पीने के लिए जहां वे बेबस हैं तो वहीं महिलाएं छत पर ही आड़ करके शौच करने को मजबूर हैं। गांव के वीरेंद्र ने बताया कि  बाढ़ के हालात ऐसे हो जाएंगे, सोचा ही नहीं था। अब बीमारी को लेकर सभी लोग डरे-सहमे हैं। 

टायर और लकड़ी जलाकर कर रहे उजाला 
बाढ़ में फंसे लोग दिन का वक्त तो किसी तरह काट ले रहे हैं लेकिन रात काटनी मुश्किल है। नदियों में तैर रहे सांपों से खतरा है तो सामान चोरी होने का डर भी। यादव टोला के जय प्रकाश यादव ने बताया कि मिट्टी का तेल खत्म हो गया है। मोमबत्ती है नहीं, रात में टायर और लकड़ी जलाकर रोशनी करते हैं। इससे मच्छर भी कम लगते हैं। सरकारी मदद तो यहां पहुंची ही नहीं, हर तरफ पानी इतना अधिक है कि रिश्तेदार भी मोबाइल पर दिलासा दे रहे हैं। 

मूक-बधिर नंदिनी ने इशारे से मांगा बिस्किट 
दीनानाथ और उनकी पत्नी झरना देवी के साथ आठ साल की नंदिनी हाथ से इशारे कर बिस्किट मांग रही थी। पीएसी जवान ने उसकी ओर एक एक बिस्किट के पैकेट फेंका तो मुस्करा उठी। झरना देवी ने बताया कि नंदिनी बोल नहीं सकती है। यह सुनकर राहत सामग्री लेकर आए शेषनाथ यादव ने दो पैकेट और फेंक दिए। 

अंकल खीर-पूड़ी नहीं है
राजेश के घर की ओर राहत सामग्री उछालकर जवानों ने फेंका तो बिस्किट और दो पैकेट पानी नीचे गिर गया। छह पर खड़ी अंजलि से जवान ने पूछा कि बिस्किट चाहिए। छह साल की अंजलि ने कहा, अंकल खीर-पड़ी नहीं है। यह सुनकर सभी जवान उस छोटी बच्ची की ओर देखते रह गए।

चार कच्चे मकान ढह गए
गांव के दिलीप प्रसाद, घसेटू प्रसाद, चैतू और भोला प्रसाद के कच्चे मकान ढह गए हैं। सारा सामान भी बाढ़ में जलमग्न हो गए हैं। सभी लोगों ने पड़ोसियों के घर शरण ली है। 
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