पत्नी यास्मीन और बच्चों के साथ सईद।
- फोटो : Amar Ujala
पत्नी के इलाज के लिए रकम जुटाने को मुंबई की सड़कों पर एक हाथ से ऑटो का हेंडल तो दूसरे में कलेजे के टुकड़े को संभाले सईद की व्यथा कथा ‘अमर उजाला’ ने छापी तो शहर से भी उनकी मदद के लिए आह्वान शुरू हो गया। कई गोरखपुरियों ने अपने फेसबुक वाल पर ‘अमर उजाला’ की खबर साझा करते हुए सईद की मदद करने की अपील की। इस बीच सईद के घरवाले उसकी पत्नी और बच्चों की देखभाल के लिए मुंबई पहुंच गए।
सईद से ‘अमर उजाला’ की फोन पर बात हुई तो उन्होंने बताया कि सहजनवां से अम्मी जैरुन्निशा, अब्बू अब्दुल शेख, भाई रईस और भाभी जेहाना मुंबई पहुंच चुके हैं। बॉलीवुड समेत विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले आर्थिक तंगी के चलते ससुराल वालों के साथ उनके परिवारवालों ने भी मुंबई आकर पत्नी की देखभाल से मना कर दिया था लेकिन अब कई लोगों ने मदद में हाथ बढ़ाया तब परिवारवालों को मुंबई बुला सका हूं। उन्होंने बताया कि गोरखपुर से कई फोन आए हैं। उन्होंने बीवी के स्वस्थ होने के बाद गोरखपुर आने की बात कही।
एक ट्वीट से खुल गई राह
काम की तलाश में 10 साल पहले सहजनवां से सईद मुंबई गए थे। बंगलूरू की यास्मीन से उनका निकाह हुआ। हाल ही में यास्मीन को लकवा मार गया तो बीवी के इलाज के साथ ही बेटे मुजम्मिल और दुधमुंही बेटी मुस्कान की परवरिश की चुनौती सईद के सामने खड़ी हो गई। पड़ोसी ने मुस्कान को संभाला तो सईद गोद में मुजम्मिल को लेकर ऑटो से सवारियां ढोने लगे। ऑटो में उनकी गोद में रोते मासूम पर फिल्म निर्देशक और पूर्व पत्रकार विनोद कापड़ी की निगाह पड़ी तो उन्होंने ये तस्वीर सईद के मोबाइल नंबर (9702098346) के साथ ट्वीट कर दी। इसके बाद ये वायरल हो गई। इसी एक ट्वीट ने सईद को परेशानियों की कैद से बाहर आने की राह खोल दी।
मदद के लिए दिया धन्यवाद
सोशल मीडिया पर सईद की मदद के लिए चले अभियान का असर रहा कि सोमवार तक उन्हें दो लाख रुपये की मदद विभिन्न संस्थाओं और लोगों से मिल चुकी थी। इस रकम से मंगलवार को उनकी बीवी यास्मीन का इलाज शुरू हो चुका है। सईद ने मुफलिसी में मददगार बने देशवासियों का आभार जताया। कहा कि जब-जब नमाज पढ़ेंगे, सभी देशवासियों के लिए दुआएं करेंगे। उनकी बीवी बोलीं, मदद को इतने हाथ आगे बढ़े कि अब हौसला जाग गया है कि मैं वापस अपने पैरों पर चल सकूंगी। डॉक्टर ने 13 दिन में मुझे मेरे पैरों पर खड़ा करने का भरोसा दिया है।